- Hindi News »
- Elections »
- Bjp West Bengal Political Strategy Analysis 2011 2021
बंगाल में BJP कैसे बनी मजबूत ताकत और उसकी चुनावी रणनीति क्या है? जानें दीदी को घेरने वाला वो चक्रव्यूह फार्मूल
BJP Plan @ Bengal: पश्चिम बंगाल में भाजपा ने महज दस साल में अपनी जड़ें गहरी की हैं, जहां पार्टी ने संगठन और हिंदुत्व के सहारे 38 फीसदी वोट हासिल कर मुख्य विपक्ष की जगह बनाई है। जानें कैसे हुआ ये सब।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय

राजनाथ सिंह, पीएम मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा, फोटो- सोशल मीडिया
West Bengal BJP Strategy: पश्चिम बंगाल की राजनीति पिछले एक दशक में एक ऐसे बड़े बदलाव की गवाह बनी है जिसने पुराने सभी समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है। कभी वामपंथी दलों और क्षेत्रीय राजनीति का अभेद्य किला माना जाने वाला यह राज्य अब भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधे मुकाबले का मैदान बन चुका है। यह बदलाव कोई रातों-रात नहीं आया बल्कि इसके पीछे वर्षों की योजनाबद्ध तैयारी और जमीन पर की गई कड़ी मेहनत छिपी है।
साल 2011 में जो पार्टी बंगाल के चुनावी नक्शे पर लगभग अदृश्य थी, वह आज राज्य की सत्ता की मुख्य दावेदार बनकर उभरी है। भाजपा की इस बढ़त ने न केवल तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनौतियां खड़ी की हैं बल्कि बंगाल के पारंपरिक राजनीतिक ढांचे को भी पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। इन सबके पीछे भाजपा ने कई रणनीतियों पर काम किया।
शून्य से 77 तक कैसे गई भाजपा?
बंगाल में भाजपा के विकास की कहानी को आंकड़ों के जरिए समझना बेहद जरूरी है। साल 2011 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को महज तीन से चार प्रतिशत वोट मिले थे और उसकी झोली में एक भी सीट नहीं आई थी। इसके पांच साल बाद 2016 में पार्टी का वोट शेयर बढ़कर दस प्रतिशत हुआ और विधानसभा में पहली बार उसके तीन प्रतिनिधियों ने प्रवेश किया।
सम्बंधित ख़बरें
चुनाव से पहले आईपैक पर ईडी का शिकंजा, क्या ऋषि राज खोलेंगे राजनीतिक चंदे के गहरे राज?
सावधान! चुनाव में ‘फेक न्यूज’ और ‘Deepfake’ फैलाया तो खैर नहीं; चुनाव आयोग करेगा कार्रवाई
PM मोदी का बंगाल प्लान: ‘0’ बिजली बिल का किया वादा, TMC को बताया विकास का रोड़ा! देखें VIDEO
बंगाल चुनाव: 4 मई के बाद इंसाफ होगा, कंगना रनौत ने दी चेतावनी; ममता बनर्जी पर जमकर साधा निशाना

असली चमत्कार 2021 के चुनावों में हुआ जब भाजपा ने अपनी ताकत को कई गुना बढ़ाते हुए 38 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया और 77 सीटों पर कब्जा जमाया। महज दस साल के भीतर तीस प्रतिशत से ज्यादा का यह वोट स्विंग भारत के किसी भी राज्य में सबसे तेज राजनीतिक उभारों में से एक माना जाता है।
बंगाल में मोदी-शाह की गुप्त चुनावी रणनीति क्या रही?
भाजपा ने बंगाल को एक लक्षित राज्य के रूप में चुनकर अपनी रणनीति को अंजाम देना शुरू किया था। इसकी शुरुआत साल 2014 के लोकसभा चुनावों से हुई जब पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार पार्टी ने बंगाल में अपनी प्रभावी मौजूदगी दर्ज कराई। इसके बाद 2019 का चुनाव पार्टी के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ जब उसने 42 में से 18 सीटें जीतकर सबको हैरान कर दिया और उसका वोट शेयर करीब चालीस प्रतिशत तक पहुंच गया।
इस बड़ी जीत से यह साफ संदेश गया कि भाजपा अब ममता बनर्जी की सरकार को सीधी चुनौती देने के लिए तैयार है। पार्टी ने इस दौरान तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ भ्रष्टाचार और सिंडिकेट राज जैसे मुद्दों को आक्रामक ढंग से उठाकर लोगों के बीच अपनी पैठ बनाई।
दलबदल और हिंदुत्व के सहारे कैसे बदला सियासी माहौल
भाजपा की मजबूती के पीछे केवल बाहरी प्रचार नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर हुए संगठन का विस्तार भी है। आरएसएस के बढ़ते कैडर ने बूथ स्तर तक पार्टी का ढांचा खड़ा करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दलों से आए बड़े नेताओं, विशेषकर शुभेंदु अधिकारी की एंट्री ने भाजपा को एक तैयार ग्राउंड नेटवर्क उपलब्ध करा दिया।
यह भी पढ़ें: महिला आरक्षण पर प्रियंका गांधी संभालेंगी कमान, BJP की तरफ से ये नेता रखेंगे अपनी बात, देखें लिस्ट
पार्टी ने नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठाकर मटुआ समुदाय और सीमावर्ती इलाकों के मतदाताओं को अपनी ओर खींचने की कोशिश की। हिंदुत्व और धार्मिक पहचान की राजनीति के जरिए भाजपा ने विपक्ष के बिखरे हुए वोटों को अपने पक्ष में एकजुट करने का काम किया।
वोट तो मिले पर सत्ता की चाबी अब भी दूर
इतनी बड़ी बढ़त के बावजूद भाजपा के सामने कुछ ऐसी कमजोरियां रहीं जिन्होंने उसे सत्ता के शिखर तक पहुंचने से रोक दिया। पार्टी आज भी बंगाल में किसी बड़े स्थानीय चेहरे की कमी से जूझ रही है और उसे प्रधानमंत्री मोदी जैसे केंद्रीय नेतृत्व पर ही निर्भर रहना पड़ता है। तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा को बाहरी पार्टी बताकर बंगाली अस्मिता का जो मुद्दा छेड़ा, उससे भाजपा को काफी नुकसान उठाना पड़ा। इसके अलावा वैचारिक और सांगठनिक स्तर पर अब भी पार्टी के भीतर कुछ कमियां नजर आती हैं जहां राष्ट्रीय मुद्दे स्थानीय समस्याओं पर भारी पड़ जाते हैं।
Bjp west bengal political strategy analysis 2011 2021
Get Latest Hindi News , Maharashtra News , Entertainment News , Election News , Business News , Tech , Auto , Career and Religion News only on Navbharatlive.com
लेटेस्ट न्यूज़
Nashik Weather: गर्मी से राहत या आफत? नासिक में बादलों का डेरा, फिर लौट आया बेमौसम बारिश का डर
Apr 20, 2026 | 09:12 AMससुर को सत्ता से हटाया और बदल दी हैदराबाद की किस्मत; वो नेता जिसके एक इशारे पर आज भी हिल जाती है दिल्ली
Apr 20, 2026 | 09:08 AMराशिद खान ने ठुकराया भारत की नागरिकता का ऑफर…BCCI ने कही थी टीम इंडिया में शामिल होने की बात, बड़ा खुलासा
Apr 20, 2026 | 09:07 AMBMC Universal Footpath Project: अश्विनी भिड़े की मंजूरी का इंतजार, 16.5 किमी फुटपाथ होंगे अपग्रेड
Apr 20, 2026 | 08:59 AMपेंच की ‘लंगड़ी’ बाघिन की कहानी, हिम्मत और जज्बे की मिसाल, 18 साल तक रही जंगल की रानी; अब बनी यादों का हिस्सा
Apr 20, 2026 | 08:55 AMसौर ऊर्जा से मिलेगी राहत: 125 करोड़ का बिजली खर्च बचाने के लिए मनपा का ‘सोलर मास्टरस्ट्रोक
Apr 20, 2026 | 08:53 AMMarathi Mandatory Rule: परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक का बड़ा फैसला, ड्राइवर यूनियन ने जताया विरोध
Apr 20, 2026 | 08:47 AMवीडियो गैलरी

क्या रील की कीमत जान से ज्यादा है? मऊगंज में स्टंटबाजी के दौरान 3 सगे भाइयों की दर्दनाक मौत- देखें VIDEO
Apr 19, 2026 | 10:01 PM
PM मोदी का बंगाल प्लान: ‘0’ बिजली बिल का किया वादा, TMC को बताया विकास का रोड़ा! देखें VIDEO
Apr 19, 2026 | 09:33 PM
क्यों लाखों फॉलोअर्स और शोहरत छोड़ संन्यासी बनीं हर्षा ऋचरिया? जानें इस बड़े फैसले की वजह! देखें VIDEO
Apr 19, 2026 | 09:13 PM
ओबीसी से लेकर परिसीमन तक…PM Modi ने विपक्ष के हर वार का दिया करारा जवाब, कहा- हम झुकेंगे नहीं
Apr 19, 2026 | 01:54 PM
ASP अनुज चौधरी का ‘स्वैग’ या नियमों का मखौल? रील बनाने वाले ‘हीरो’ अफसर की गाड़ी में मिलीं 3 बड़ी कमियां
Apr 18, 2026 | 10:42 PM
UP News: 10 हजार रुपये जमा फिर भी 4 हजार बकाया? बिजली बिल के खेल में फंसा आम आदमी
Apr 18, 2026 | 10:32 PM













