

Union Budget 2026: भारतीय राजनीति और अर्थशास्त्र के गलियारों में एक सवाल हमेशा गूंजता है। वह क्या है जो निर्मला सीतारमण को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक टीम का सबसे भरोसेमंद चेहरा बनाता है? लगातार सातवीं बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड बनाने की दहलीज पर खड़ी सीतारमण केवल एक वित्त मंत्री नहीं, बल्कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की 'मुख्य वास्तुकार' बनकर उभरी हैं। बजट 2026 से पहले, आइए समझते हैं उनके वित्तीय प्रबंधन के उन स्तंभों को, जिन्होंने पीएम मोदी का अटूट विश्वास जीता है।
निर्मला सीतारमण के कार्यकाल की सबसे बड़ी खूबी 'राजकोषीय अनुशासन' रही है। दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं जब लोकलुभावन घोषणाओं के दबाव में बिखर रही थीं, तब सीतारमण ने भारत के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित रखने पर जोर दिया। पीएम मोदी के 'सुशासन' के विजन को अमली जामा पहनाते हुए उन्होंने सुनिश्चित किया कि सरकार कर्ज के जाल में न फंसे। उन्होंने 2025-26 तक राजकोषीय घाटे को GDP के 4.5% से नीचे लाने का जो रोडमैप तैयार किया, उस पर वह अडिग रहीं।
पीएम मोदी के भरोसे की सबसे बड़ी परीक्षा कोरोना काल में हुई। जब वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं धराशायी हो रही थीं, सीतारमण ने 'आत्मनिर्भर भारत' पैकेज के जरिए न केवल गरीबों को सुरक्षा कवच दिया, बल्कि सप्लाई चेन को भी चालू रखा। उनकी नीतियों के कारण ही भारत आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही तीसरी बनने की ओर अग्रसर है। 'कैपेक्स' (Capital Expenditure) पर उनका जोर भारतीय बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की नींव बना।
निर्मला सीतारमण को उनकी 'नो-नॉनसेन्स' अप्रोच के लिए जाना जाता है। चाहे कॉर्पोरेट टैक्स में ऐतिहासिक कटौती हो या बैंकिंग सेक्टर का विलय, उन्होंने उन सुधारों को लागू किया जो दशकों से लंबित थे। पीएम मोदी को एक ऐसे वित्त मंत्री की जरूरत थी जो राजनीतिक शोर के बीच आर्थिक सुधारों को न रोके, और सीतारमण इस पैमाने पर पूरी तरह खरी उतरीं।
GST संग्रह में निरंतर रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी और डिजिटल भुगतान (UPI) के विस्तार में सीतारमण के मंत्रालय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भ्रष्टाचार मुक्त अर्थव्यवस्था के मोदी के सपने को साकार करने के लिए उन्होंने 'फेसलेस असेसमेंट' और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) को सशक्त बनाया, जिससे सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचने लगा।
बजट 2026 में जब देश 'विकसित भारत' के लक्ष्य की ओर देख रहा है, निर्मला सीतारमण का अनुभव और पीएम मोदी का उन पर भरोसा भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करता है। उनकी जोड़ी ने यह साबित किया है कि ठोस आर्थिक सिद्धांतों और राजनीतिक इच्छाशक्ति के मेल से कठिन से कठिन वैश्विक चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।