एक महीने में 30 दिन, लेकिन वैलिडिटी 28 दिन का ही क्यों; ग्राहकों से कैसे एक्स्ट्रा पैसा कमा रही कंपनियां?

Telecom 28 days Recharge Plan: एक महीने में 30 दिन होते हैं, लेकिन जब टेलीकॉम कंपनियां 28 दिन के रिचार्ज का विकल्प दे रही हैं तो लोगों के मन में सवाल उठता है कि किया उनके साथ धोखा हो रहा है।
how telecom companies earned extra money
ग्राहकों से कैसे एक्स्ट्रा पैसा कमा रहीं टेलीकॉम कंपनियां, ( AI जेनरेटेड इमेज)
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Telecom Companies 28 days Recharge Plan: एयरटेल, जियो और वोडाफोन-आइडिया जैसी देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां काफी चालाकी से एक महीने के रिचार्ज की वैलिडिटी को घटाकर 28 दिन कर चुकी हैं। यह सवाल लगभग हर मोबाइल यूजर के मन में कभी न कभी जरूर आता है कि ऐसा क्यों? पहली नजर में यह एक सोची-समझी चालाकी या यूजर्स के साथ धोखा ही लगता है। ऐसा इसलिए की जब हम मंथली रिचार्ज कहते हैं, तो इसका मतलब 30 दिन हुआ।

हालांकि, इसके पीछे कंपनियों की बहुत सोच-समझी मैथेमेटिकल मॉडल काम करता हैं। आइए इसके पीछे के पूरे कैलकुलेशन और सरकार के इस पर किया नियम हैं, उसे आसान भाषा में समझते हैं।

28 दिन का फॉर्मूला कंपनियों के लिए फायदेमंद

औसत 30 दिन को एक महीना कहा जाता है, लेकिन जब टेलीकॉम कंपनियां ग्राहकों को 28 दिन के रिचार्ज का विकल्प दे रही हैं तो लोगों के मन में सवाल उठता है कि किया कंपनियां उन्हें धोखा रही हैं? इसका जवाब है- नहीं। दरअसल, कंपनियां अपने सभी रिजार्ज प्लान पर साफ-साफ वैलिडिटी के दिन को भी लिखकर बताती है। हालांकि वे आपके मनोविज्ञान से जरूर खेलती हैं। यदि आप एक साल यानी की 365 दिन को कंपनियों के 28 दिन के साइकल से भाग करेंगे, तो गठित कुछ ऐसा बैठता है।

कंपनियों को एक महीने की एक्स्ट्रा कमाई

  • अगर कंपनियां 30 दिन का प्लान देंगी, तो आप साल में 12 बार रिचार्ज करेंगे।
  • लेकिन 28 दिन का प्लान होने की वजह से हर महीने के 2 या 3 दिन बच जाते हैं।
  • ये बचे हुए दिन साल के आखिर तक जुड़कर पूरे 28 दिन यानी एक पूरे एक्स्ट्रा महीने का रिचार्ज बना देते हैं।
  • आप साल में 12 की जगह 13 बार रिचार्ज करते हैं।
  • कंपनियों को बैठे-बिठाए हर ग्राहक से एक एक्स्ट्रा महीने की कमाई हो जाती है।

28 दिन के फॉर्मूले पर कंपनियों की दलील

जब इस मुद्दे पर कंपनियों से सवाल किया गया, तो उनका तर्क थोड़ा तकनीकी था। टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि कैलेंडर के सभी महीने बराबर नहीं होते। कोई महीना 31 दिन का होता है, कोई 30 का, तो फरवरी 28 या 29 दिन की होती है। प्रीपेड सिस्टम को ऑटोमैटिक और फिक्स रखने के लिए उन्होंने 28 दिन का एक ऐसा स्टैंडर्ड साइकिल चुना, जो हर महीने बिना किसी बदलाव के फिट बैठ सके।

क्या इस पर अब तक कोई एक्शन हुआ?

ग्राहकों की इसी नाराजगी को देखते हुए देश के टेलीकॉम रेगुलेटर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ( TRAI) ने सख्त रुख अपनाया है। टेलीकॉम रेग्युलेटर के आदेश के मुताबिक, अब सभी टेलीकॉम कंपनियों जैसे कि जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया के लिए अपने पोर्टफोलियो में कम से कम एक प्लान ऐसा रखना जरूरी है, जिसकी वैलिडिटी पूरे 30 दिनों की हो। इसके साथ ही एक कैलेंडर मंथ प्लान भी देना होता है, जो हर महीने की उसी सेम तारीख को रिन्यू होता है (जैसे अगर 15 तारीख को रिचार्ज किया, तो अगला रिचार्ज अगली 15 को ही होगा, चाहे महीना 31 का हो या 28 का)।

सरकार भी लगातार कंपनियों पर दबाव बना रही है कि वे इन 30 दिन वाले प्लान्स को फ्रंट पर प्रमोट करें ताकि ग्राहकों को सही जानकारी और विकल्प मिल सके। बावजूद इसके कंपनियां आज भी 28 दिन वाले प्लान सबसे ज्यादा बेचती हैं, क्योंकि वे सस्ते दिखते हैं।

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