तेजस्वी यादव, ओवैसी और नीतीश कुमार
Bihar Pre-Election Survey: बिहार चुनाव नजदीक आते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। महागठबंधन के नेता राहुल गांधी और तेजस्वी यादव वोट अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं, वहीं एनडीए के बड़े नेता लगातार रैलियां कर रहे हैं। इस समय सभी की नजरें सीमांचल इलाके पर टिकी हुई हैं। Times Now–JVC ओपिनियन पोल के मुताबिक, अगर अभी चुनाव होते हैं तो एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिल सकता है। सर्वे का अनुमान है कि एनडीए 243 सीटों वाली विधानसभा में 136 सीटें जीत सकता है। वहीं, महागठबंधन को 75 सीटों तक सीमित बताया गया है। बहुमत का आंकड़ा 122 है।
सर्वे के अनुसार, सीमांचल की 24 सीटों में एनडीए और महागठबंधन दोनों को 10-10 सीटें मिल सकती हैं, जबकि एआईएमआईएम को 3 सीटें मिलने का अनुमान है। एक सीट पर बेहद करीबी मुकाबला होने की संभावना जताई गई है।
बिहार के सीमांचल इलाके में अररिया, किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया जिले आते हैं, जो अब राजनीति का अहम केंद्र बन चुका है। इस इलाके में मुस्लिम आबादी सबसे ज्यादा है। औसतन 47% मुस्लिम जनसंख्या वाले इस क्षेत्र में वोटों का गणित चुनावी नतीजों को प्रभावित करता रहा है। किशनगंज जिले में तो मुस्लिम आबादी 70% तक है।
जून 2022 में बड़ा सियासी बदलाव हुआ। बिहार में AIMIM के 5 में से 4 विधायक राजद (RJD) में शामिल हो गए। अब AIMIM के पास सिर्फ एक विधायक, अख्तरुल इमान ही बचे हैं। इन विधायकों के RJD में जाने से लालू प्रसाद यादव की पार्टी फिर से बिहार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन गई। उनकी संख्या बढ़कर 80 हो गई।
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सीमांचल की राजनीति हमेशा धार्मिक और सामाजिक समीकरणों से प्रभावित रही है। मुस्लिम वोटों का बड़ा हिस्सा अब तक राजद-कांग्रेस के खाते में जाता रहा, लेकिन 2020 में एआईएमआईएम की एंट्री ने तस्वीर बदल दी। भाजपा और जेडीयू ने भी यहां अपनी पकड़ मजबूत की है। इस बार राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यात्राओं से महागठबंधन उम्मीदें लगाए बैठा है, लेकिन सर्वे कह रहा है कि मुकाबला आसान नहीं होगा। सीमांचल का हर वोट इस बार बिहार की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।