आखिरकार दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद को मिली अंतरिम जमानत, इस वजह से पसीजा कोर्ट का दिल

Delhi दंगों के मामले में जेल में बंद JNU के पूर्व छात्र नेता Umar Khalid को आखिरकार कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने मानवीय आधार पर फैसला लेते हुए खालिद को अंतरिम जमानत दी।
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दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद को मिली अंतरिम जमानत (फोटो- सोशल मीडिया)
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Delhi Riots Accused Umar Khalid Interim Bail: दिल्ली दंगों के मामले में जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को आखिरकार कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने मानवीय आधार पर फैसला लेते हुए खालिद को अंतरिम जमानत दे दी है। यह राहत उन्हें उनकी बहन की शादी में शामिल होने के लिए दी गई है। लंबे समय से जेल की सलाखों के पीछे दिन काट रहे खालिद अब कुछ दिनों के लिए अपने परिवार के बीच खुशियां बांट सकेंगे। हालांकि, इस आजादी के साथ कोर्ट ने उन पर कई सख्त शर्तें भी लगाई हैं जिनका उन्हें सख्ती से पालन करना होगा।

उमर खालिद ने अपनी याचिका में 14 दिसंबर से रिहाई की मांग की थी, क्योंकि 27 दिसंबर को उनकी बहन का निकाह है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद उन्हें 16 दिसंबर से 29 दिसंबर तक की अंतरिम जमानत दी है। आदेश के अनुसार, उन्हें 29 दिसंबर की शाम को वापस सरेंडर करना होगा। रिहाई के दौरान उन पर कई पाबंदियां रहेंगी। सबसे अहम शर्त यह है कि वे सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहेंगे और किसी भी तरह का कोई पोस्ट नहीं करेंगे, ताकि जांच या गवाहों पर कोई असर न पड़े।

गवाहों से दूरी और सख्त पहरा

रिहाई की शर्तों को लेकर अदालत ने बिल्कुल साफ कर दिया है कि उमर खालिद बाहर आने के बाद किसी भी गवाह से संपर्क नहीं साधेंगे। उन्हें सिर्फ अपने परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलने की अनुमति होगी। यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि इससे पहले उनकी जमानत याचिकाएं कई बार खारिज हो चुकी थीं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलों में कहा था कि 2020 की हिंसा कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। तुषार मेहता ने कहा कि यह एक मिथक है कि विरोध प्रदर्शन से दंगे भड़के, बल्कि सबूत बताते हैं कि यह सब पहले से तय था।

दंगों की वो खौफनाक यादें

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था, जिसमें कई लोगों की जान गई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। पुलिस का आरोप है कि उमर खालिद और शरजील इमाम ने सीएए और एनआरसी विरोध प्रदर्शनों की आड़ में हिंसा की पटकथा लिखी थी। इस मामले में उन पर यूएपीए के तहत केस दर्ज है। कोर्ट में व्हाट्सएप चैट और भाषणों का हवाला दिया गया था, जिसमें शरजील इमाम के चक्का जाम वाले बयान का भी जिक्र आया था। इन गंभीर आरोपों के बीच बहन की शादी के लिए मिली यह जमानत खालिद के परिवार के लिए एक बड़ी राहत है।

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