
संयुक्त राष्ट्र में वित्तीय संकट (सोर्स- सोशल मीडिया)
United Nations Financial Crisis: संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि अगर वित्तीय नियमों में बदलाव नहीं किया गया या सभी 193 सदस्य देशों ने अपने बकाया भुगतान नहीं किए, तो संगठन को जल्द ही गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ सकता है। माना जा रहा है कि गुटेरेस ने यह बात विशेष रूप से अमेरिका की ओर इशारा करते हुए कही है, जिसके ऊपर संयुक्त राष्ट्र का अरबों डॉलर बकाया है।
गुटेरेस ने सभी सदस्य देशों को लिखे पत्र में कहा कि संगठन का बजट जुलाई तक समाप्त हो सकता है, जिससे संयुक्त राष्ट्र के कामकाज पर बड़ा असर पड़ेगा। उन्होंने लिखा, “सभी सदस्य देश अपने वित्तीय दायित्वों का पालन करें और समय पर भुगतान करें, या फिर हमारे वित्तीय नियमों में मौलिक बदलाव करें ताकि तत्काल वित्तीय पतन को रोका जा सके।”
पत्र में किसी देश का नाम नहीं लिया गया, लेकिन यह वित्तीय संकट ऐसे समय आया है जब संगठन का सबसे बड़ा दाता अमेरिका अपनी देनदारी से पीछे हट गया है। संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी के अनुसार अमेरिका का सामान्य बजट में 2.196 अरब डॉलर बकाया है, और इस साल के लिए 767 मिलियन डॉलर और बकाया होगा। इसके अलावा, शांति रक्षा अभियानों के अलग बजट में अमेरिका का 1.8 अरब डॉलर का बकाया है।
अमेरिका के बाद वेनेजुएला का 38 मिलियन डॉलर का बकाया है। देश की अर्थव्यवस्था पहले से संकट में थी और हाल ही में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो सत्ता से हट गए। 2 साल तक बकाया भुगतान न करने के कारण वेनेजुएला ने महासभा में अपना मतदान अधिकार भी खो दिया। गुटेरेस ने बताया कि 2025 के अंत तक संयुक्त राष्ट्र की बकाया राशि रिकॉर्ड 1.568 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जो 2024 के मुकाबले दोगुनी है।
संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल कोई बकाया नहीं चुकाया। इतनी बड़ी बकाया राशि के कारण UN के सभी लिक्विड फंड लगभग खत्म हो चुके हैं। गुटेरेस ने चेतावनी दी कि अगर भुगतान में सुधार नहीं हुआ, तो संयुक्त राष्ट्र दिसंबर में महासभा द्वारा सर्वसम्मति से मंजूर 3.45 अरब डॉलर के 2026 के सामान्य बजट को पूरा नहीं कर पाएगा।
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उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा नियमों के अनुसार, यदि सामान्य बजट से कोई पैसा खर्च नहीं हुआ, तो उसे सदस्य देशों को लौटाना पड़ता है, चाहे वह भुगतान हुआ हो या नहीं। गुटेरेस ने सदस्य देशों से इस नियम में बदलाव की भी अपील की।






