

Iran Indian Ship Hormouz Strait: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग 19वें दिन में प्रवेश कर गया है। फिलहाल किसी भी पक्ष ने सीजफायर के संकेत नहीं दिए हैं। मिडिल ईस्ट में इस संघर्ष के चलते दुनियाभर में कच्चे तेल और गैस के भाव आसमान छू रहे हैं। क्योंकि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर लगातार हमले कर रहा है। जिससे तेल कंपनियों में डर का माहौल है।
इसी बीच ईरान ने इसे लेकर बयान जारी किया है। ईरान का कहना है कि उसका उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पूरी तरह बंद करना नहीं है। यह बात ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादा ने कही। उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि वे उन देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दे रहे हैं, जो इजरायल-अमेरिका गठबंधन के खिलाफ नहीं हैं।
ईरान ने इजरायल और अमेरिका के हमलों के जवाब में होर्मुज स्ट्रेट में कुछ रुकावटें पैदा की हैं। इस संकरे समुद्री मार्ग के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा रहा है, और भारत में भी एलपीजी की आपूर्ति में दिक्कतें देखने को मिली हैं। हालांकि, कुछ भारतीय जहाज हाल ही में इस मार्ग से गुजर चुके हैं, लेकिन पूरी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने कहा कि तेहरान ने कुछ भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है। उन्होंने जहाजों की संख्या नहीं बताई, लेकिन पुष्टि की कि दो टैंकर एलपीजी लेकर भारत पहुंच चुके हैं। अभी 20 से अधिक भारतीय जहाजों को मार्ग से गुजरने की अनुमति का इंतजार है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि कई देशों ने मार्ग के लिए संपर्क किया है, और इसके बारे में फैसला ईरानी सेना करेगी। भारत, पाकिस्तान, तुर्की समेत कुछ देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जा चुकी है, लेकिन पूरी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है और दुनिया का एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ईरान के प्रभाव वाले इस जलडमरूमध्य की चौड़ाई केवल 54 किलोमीटर है। युद्ध शुरू होने के बाद से यहां समुद्री यातायात लगभग ठप हो गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट हर हाल में खुलना चाहिए। उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और यूके से क्षेत्र में अपने युद्धपोत भेजने की मांग की, लेकिन अब तक कोई देश सक्रिय होने को तैयार नहीं दिखा है।