
शहबाज शरीफ का कश्मीर पर भड़काऊ बयान (सोर्स-सोशल मीडिया)
Shehbaz Sharif Kashmir Solidarity Day Speech: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कश्मीर मुद्दे पर एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगला है। ‘कश्मीर सॉलिडेरिटी डे’ के अवसर पर आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने विवादित बयान दिया। शरीफ ने मुजफ्फराबाद में कहा कि कश्मीर आने वाले समय में पाकिस्तान का अटूट हिस्सा बनकर रहेगा। इस बयान के बाद भारत ने भी पलटवार करते हुए पाकिस्तान के दावों की हवा निकाल दी है।
शहबाज शरीफ ने गुरुवार को मुजफ्फराबाद में असेंबली के सामने कश्मीरी लोगों के प्रति अपना समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर विवाद का समाधान केवल वहां के लोगों की इच्छाओं के सम्मान से ही संभव है। पाकिस्तानी पीएम ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पुराने प्रस्तावों को लागू करने की मांग भी की।
शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान की स्थापना के समय से ही कश्मीर के प्रति उसकी प्रतिबद्धता अटूट बनी हुई है। उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना के उस बयान का हवाला दिया जिसमें कश्मीर को पाकिस्तान की ‘लाइफलाइन’ कहा गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की विदेश नीति पूरी तरह से कश्मीर मुद्दे पर ही आधारित है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने दावा किया कि इस्लामाबाद इस पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना चाहता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह शांति केवल समानता और न्याय के आधार पर ही स्थापित हो सकती है। शरीफ ने कश्मीरी भाइयों के साथ खड़े होने के लिए पाकिस्तानी नेतृत्व की ओर से अपना संदेश दिया।
भारत सरकार ने पाकिस्तान के इन सभी दावों को पूरी तरह से निराधार और अवैध बताकर खारिज कर दिया है। नई दिल्ली ने स्पष्ट किया कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख हमेशा भारत का अभिन्न हिस्सा रहेंगे। भारत ने बार-बार पाकिस्तान को सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा न देने की सख्त चेतावनी दी है।
भारत ने पाकिस्तान पर अपने आंतरिक मामलों में अनुचित तरीके से दखल देने का गंभीर आरोप लगाया है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान अपनी घरेलू समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए कश्मीर राग अलापता रहता है। कश्मीर सॉलिडेरिटी डे के बहाने पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर गलत नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहा है।
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शहबाज शरीफ के इस नए बयान ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयानों से द्विपक्षीय बातचीत की संभावनाओं को बड़ा झटका लगता है। भारत ने अपनी बोलती बंद कर दी और स्पष्ट कर दिया कि उसकी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होगा।






