जनगणना ने खोली पोल! हर तीसरा पाकिस्तानी युवा बेरोजगार, सिस्टम की नाकामी ने देश को बना दिया 'टाइम बम'

Pakistan Unemployment Rate: पाकिस्तान की पहली डिजिटल जनगणना ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। देश में बेरोजगारी दर 8% पहुंच चुकी है और लाखों युवा रोजगार, शिक्षा और प्रशिक्षण से वंचित हैं।
The census has revealed the truth! Every third Pakistani youth is unemployed! Systemic failure has turned the country into a 'time bomb'.
हर तीसरा पाकिस्तानी युवा बेरोजगार, सांकेतिक एआई फोटो
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Pakistan News In Hindi: पाकिस्तान में पहली बार कराई गई डिजिटल जनगणना ने देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार स्थिति की सच्चाई सामने रख दी है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में बेरोजगारी दर 8 प्रतिशत के करीब पहुंच चुकी है, जिससे लाखों युवाओं के सामने रोजगार का संकट गहराता जा रहा है।

पाकिस्तान ऑब्जर्वर की एक विस्तृत रिपोर्ट बताती है कि देश की 24.15 करोड़ की आबादी में से लगभग 1.87 करोड़ युवा नौकरी से वंचित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़ा सिर्फ आधिकारिक बेरोजगारी को दर्शाता है जबकि असल संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई युवा “नीट” (NEET) वर्ग में आते हैं, यानी जो न शिक्षा, न रोजगार और न प्रशिक्षण से जुड़े हैं।

हर तीन में से एक युवा बेरोजगार

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 15 से 35 वर्ष की आयु वर्ग के हर तीन में से एक युवा बेरोजगार है। वहीं, काम करने की उम्र वाली आबादी लगभग 17.17 करोड़ लोग में से करीब 11 फीसदी के पास कोई रोजगार नहीं है। “नीट” श्रेणी में शामिल वे लोग हैं जिन्होंने नौकरी की तलाश छोड़ दी है या असंगठित कार्यों में लगे हैं जहां न नियमित वेतन है न स्थायित्व। इस स्थिति ने पाकिस्तान की महिला श्रम भागीदारी दर को भी प्रभावित किया है, जो पहले से ही बेहद कम है। आधी आबादी की यह निष्क्रियता देश की आर्थिक प्रगति के लिए बड़ी बाधा बन चुकी है।

शिक्षा व्यवस्था अब भी पुराने ढर्रे पर

रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि पाकिस्तान का लेबर मार्केट और शिक्षा प्रणाली एक-दूसरे के अनुरूप नहीं हैं। कौशल और नौकरियों की मांग में भारी असंतुलन पैदा हो गया है, जिसके चलते संरचनात्मक बेरोजगारी (Structural Unemployment) तेजी से बढ़ रही है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की शिक्षा व्यवस्था अब भी पुराने ढर्रे पर चल रही है। व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों की कमी, तकनीकी शिक्षा की अनदेखी, और सरकारी नौकरियों पर अत्यधिक निर्भरता ने युवाओं को सीमित विकल्पों में फंसा दिया है। परिणामस्वरूप, लाखों पढ़े-लिखे युवा आज बेरोजगार हैं।

2025 की रिपोर्ट के अनुसार, देश का कुल श्रमबल 8 करोड़ 51 लाख 80 हजार है, जिसमें से 68 लाख 10 हजार लोग बेरोजगार हैं। रोजगार दर 52.2 प्रतिशत पर सिमट गई है, यानी आधे से ज्यादा लोग या तो बेरोजगार हैं या अपनी योग्यता से कमतर नौकरियों में काम कर रहे हैं।

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