साल में सिर्फ 11 दिन खुलता है ये मंदिर, जहां दीया एक बार जलने पर पूरे साल जलता रहता है!

Hasanamba Temple: दक्षिण भारत का एक रहस्यमयी और आस्था से जुड़ा मंदिर इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा में है। दावा किया जा रहा है कि इस मंदिर में जलाया गया दीया पूरे एक साल तक बिना बुझे जलता रहता है
temple opens for only 11 days a year, and once the lamp is lit Hasanamba Temple mystery
Hasanamba Temple (Source. Pinterest)
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Hasanamba Temple Mystery: दक्षिण भारत का एक रहस्यमयी और आस्था से जुड़ा मंदिर इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा में है। दावा किया जा रहा है कि इस मंदिर में जलाया गया दीया पूरे एक साल तक बिना बुझे जलता रहता है। यही नहीं, यहां रखा प्रसाद, चावल और फूल भी महीनों नहीं, बल्कि साल भर ताज़ा रहते हैं। यह मंदिर है कर्नाटक के हासन जिले में स्थित हसनंबा मंदिर, जिसे भक्त चमत्कारी मानते हैं।

सालभर बंद रहता है हसनंबा मंदिर

हसनंबा मंदिर को दक्षिण भारत के सबसे अनोखे मंदिरों में गिना जाता है। यह मंदिर पूरे साल बंद रहता है और साल में सिर्फ एक बार, करीब 11 दिनों के लिए श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोला जाता है। इन्हीं सीमित दिनों में लाखों भक्त मां हसनंबा के दर्शन के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं।

दीया जलने का रहस्य क्या है?

मंदिर से जुड़ी सबसे बड़ी मान्यता यही है कि जब मंदिर के कपाट बंद किए जाते हैं, उस समय अंदर एक दीया जलाया जाता है। जब लगभग एक साल बाद मंदिर दोबारा खोला जाता है, तो वही दीया जलता हुआ पाया जाता है। भक्तों का विश्वास है कि यह किसी सामान्य प्रक्रिया का नहीं, बल्कि मां की दिव्य शक्ति का प्रमाण है।

तेल खत्म नहीं होता, यही चमत्कार

आमतौर पर किसी भी दीये में तेल कुछ घंटों या दिनों में समाप्त हो जाता है, लेकिन हसनंबा मंदिर में यह मान्यता है कि दीये का तेल पूरे साल खत्म नहीं होता। भक्त इसे देवी की कृपा मानते हैं और इसी वजह से इस रहस्य को लेकर श्रद्धा और उत्सुकता दोनों बनी रहती हैं।

एक साल तक खराब नहीं होता चावल

यहां एक और हैरान करने वाली बात सामने आती है। कहा जाता है कि मंदिर में रखा पका हुआ चावल, जो आमतौर पर दो दिन में खराब हो जाता है, वह पूरे एक साल तक ताजा रहता है। न उसमें बदबू आती है और न ही वह सड़ता है।

फूल भी रहते हैं ताजा और खुशबूदार

मंदिर के अंदर चढ़ाए गए चमेली के फूल भी सालभर ताजा और खुशबूदार बने रहते हैं। भक्तों का मानना है कि यह भी मां की जागृत शक्ति का संकेत है।

वैज्ञानिक भी रह जाते हैं हैरान

विज्ञान के अनुसार बिना हवा और रोशनी के दीये का जलते रहना और भोजन का खराब न होना असंभव माना जाता है। यही वजह है कि इस मंदिर से जुड़ी मान्यताओं को सुनकर वैज्ञानिक भी हैरानी जताते हैं।

भक्तों की अटूट आस्था

भक्तों का विश्वास है कि यह कोई तकनीक या इंजीनियरिंग का कमाल नहीं, बल्कि मां सत्यमात्रिका की दिव्य शक्ति है। मान्यता है कि यहां स्वयं मां का पहरा रहता है और समय भी उनके आदेश से चलता है।

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