SIR विवाद में ममता बनर्जी के समर्थन में उतरी शिवसेना UBT, दुबे बोले- इतनी हिम्मत तो बड़े वकील भी नहीं दिखाते

Supreme Court SIR Hearing: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) विवाद पर ममता बनर्जी की याचिका के बाद शिवसेना (UBT) ने उनकी बहादुरी की तारीफ की है और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं।
Anand Dubey and Mamata Banerjee
आनंद दुबे व ममता बनर्जी (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Anand Dubey On Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मचा राजनीतिक घमासान अब देश की सबसे बड़ी अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर दिया है, जिससे चुनावी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इस बीच, शिवसेना (UBT) ने ममता बनर्जी के इस रुख का पुरजोर समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।

ममता की 'दलील' से हड़कंप

शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने ममता बनर्जी की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा कि जिस तरह से मुख्यमंत्री ने कोर्ट में अपनी बात रखी है, वैसी हिम्मत बड़े-बड़े दिग्गज वकील भी नहीं दिखा पाते। दुबे ने कहा कि ममता दीदी ने एसआईआर में हो रही धांधलियों और त्रुटियों को जिस स्पष्टता से सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा, उसे पूरा देश सलाम कर रहा है। उन्होंने कोर्ट से सीधा सवाल किया कि अगर न्यायपालिका उनकी बात नहीं सुनेगी, तो कौन सुनेगा?

सिर्फ 12 राज्यों में ही पुनरीक्षण क्यों?

आनंद दुबे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर देश के सभी 29 राज्यों के बजाय केवल 12 राज्यों में ही SIR (Special Intensive Revision) क्यों कराया जा रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस प्रक्रिया के जरिए चुनावी धांधली की कोशिश कर रही है और ममता बनर्जी के इस साहसी कदम से बीजेपी नेतृत्व वाली केंद्र सरकार घबराई हुई है। उन्होंने भरोसा जताया कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी कर देगा।

राहुल गांधी और रवनीत बिट्टू विवाद पर भी बोले दुबे

मतदाता सूची विवाद के अलावा, आनंद दुबे ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और राहुल गांधी के बीच हुई हालिया नोकझोंक पर भी टिप्पणी की। उन्होंने इसे 'सिख समाज' से जोड़ने को गलत बताया। दुबे ने कहा, "राहुल गांधी और रवनीत बिट्टू पुराने दोस्त रहे हैं। बिट्टू को राजनीति में लाने और टिकट दिलाने में राहुल गांधी की बड़ी भूमिका थी। यह दो पुराने दोस्तों के बीच की कड़वाहट हो सकती है, जिसमें एक दोस्त गद्दारी का सवाल पूछ रहा है। इसे धार्मिक रंग देना या राहुल गांधी को बदनाम करना सरासर गलत है।

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