

Major Ayesha Khan UN Peacekeeping Cyprus: संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा मिशन में तैनात पाकिस्तान सेना की एक महिला अधिकारी मेजर आयशा खान इन दिनों अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। मेजर आयशा ने हाल ही में साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (UNFICYP) के साथ अपना एक साल से अधिक का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया है। उनकी विदाई के मौके पर संयुक्त राष्ट्र ने उनके पेशेवर कौशल और शांति प्रयासों की जमकर प्रशंसा की है।
मेजर आयशा शौकत खान पाकिस्तान सशस्त्र बलों की एक समर्पित और अत्यंत कुशल अधिकारी हैं। उनके पास एक मजबूत सैन्य पृष्ठभूमि होने के साथ-साथ सार्वजनिक मामलों और रणनीतिक संचार में विशेष विशेषज्ञता है। संयुक्त राष्ट्र के मिशन में उन्होंने 'मिलिट्री पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर' (MPIO) के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उनके काम के अलावा, सोशल मीडिया पर उनकी सादगी और व्यक्तित्व की भी काफी चर्चा हो रही है।
साइप्रस में अपने कार्यकाल के दौरान, मेजर खान ने UNFICYP के लिए मीडिया जुड़ाव और जनसंपर्क के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विशेष रूप से बफर जोन से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर मीडिया के साथ समन्वय किया और रणनीतिक संचार के माध्यम से शांति बनाए रखने में मिशन की मदद की। 1 अप्रैल, 2026 को इस मिशन में उनका आखिरी दिन था जिस पर UNFICYP ने उन्हें विशेष विदाई दी।
मेजर आयशा खान की पहचान केवल एक सैन्य अधिकारी के रूप में ही नहीं बल्कि शांति अभियानों में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाली एक अग्रणी आवाज के रूप में भी हुई है। उन्होंने वर्दीधारी महिला शांति सैनिकों के लिए एक 'फोकल पॉइंट' के रूप में कार्य किया। उनका मुख्य उद्देश्य शांति स्थापना अभियानों में महिलाओं की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करना और उन्हें नेतृत्वकारी भूमिकाओं के लिए प्रोत्साहित करना था। उनके इन प्रयासों के कारण ही मिशन में महिलाओं के नेतृत्व को नई पहचान मिली।
ज्ञात हो कि साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (UNFICYP) की स्थापना साल 1964 में की गई थी। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य साइप्रस में दोबारा लड़ाई शुरू होने से रोकना, बफर जोन की सुरक्षा सुनिश्चित करना और एक स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए अनुकूल माहौल बनाना है। मेजर खान ने उस चुनौतीपूर्ण समय में सेवा दी जब दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली और समुदायों के बीच बातचीत को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे।
मेजर आयशा खान के योगदान को स्वीकार करते हुए UNFICYP ने अपने आधिकारिक 'X' हैंडल पर लिखा कि उन्होंने मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाई है। पाकिस्तान लौटने पर मेजर खान के पास अब अंतरराष्ट्रीय मिशनों का एक समृद्ध अनुभव है, जो भविष्य में उनके सैन्य करियर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।