सिंधु जल संधि पर भारत का पाकिस्तान को कड़ा जवाब, हेग कोर्ट का फैसला खारिज; कहा- 'अवैध' है यह पूरी प्रक्रिया

Hague Tribunal Decision: भारत ने हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय के फैसले को 'अवैध' करार देते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया है। सरकार ने साफ किया कि आतंकवाद के खात्मे तक कोई समझौता संभव नहीं है।
India Delivers Strong Rebuke to Pakistan over Indus Waters Treaty, Rejects Hague Court Ruling; Declares Entire Process 'Illegal'
रणधीर जायसवाल, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

India Rejects Hague Tribunal Decision: भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने जल विवाद में एक बार फिर तनाव चरम पर है। भारत ने शनिवार को हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के उस फैसले को पूरी तरह से ठुकरा दिया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर की जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर पाकिस्तान की आपत्तियों पर सुनवाई की गई थी। भारत ने स्पष्ट शब्दों में इस पूरी कानूनी प्रक्रिया को 'अवैध' और संधि के विरुद्ध बताया है।

'अवैध' न्यायाधिकरण की कार्यवाही को मान्यता नहीं

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि 'कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन' (COA) का 15 मई का यह फैसला भारत को कतई स्वीकार्य नहीं है। भारत का तर्क है कि इस न्यायाधिकरण का गठन ही अवैध रूप से किया गया है इसलिए इसके द्वारा जारी कोई भी निर्णय या कार्यवाही कानूनी रूप से शून्य है। भारत ने पहले भी इस निकाय की स्थापना को मान्यता देने से इनकार कर दिया था और अब इसके हालिया फैसले को भी सिरे से खारिज कर दिया है।

भारत का सख्त रुख

इस पूरे विवाद के पीछे भारत की एक बड़ी नीतिगत घोषणा छिपी है। दरअसल, मई 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का एकतरफा और कड़ा फैसला लिया था। भारत सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और विश्वसनीय तरीके से खत्म नहीं करता, तब तक यह संधि बहाल नहीं की जाएगी। सरकार का मानना है कि 'आतंकवाद और बातचीत' एक साथ नहीं चल सकते और यह सिद्धांत जल समझौतों पर भी समान रूप से लागू होता है।

संधि के प्रावधानों का दुरुपयोग

भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने जानबूझकर सिंधु जल संधि के प्रावधानों का दुरुपयोग किया है। संधि के नियमों के अनुसार, किसी भी तकनीकी मुद्दे या विवाद का निपटारा Neutral Experts के माध्यम से या दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत से किया जाना चाहिए। पाकिस्तान ने इन विकल्पों को दरकिनार कर सीधे मध्यस्थता अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसे भारत संधि की मूल भावना का गंभीर उल्लंघन मानता है।

विदेश मंत्रालय ने दोहराया है कि जब तक संधि स्थगित है, भारत इसके किसी भी दायित्व को पूरा करने के लिए बाध्य नहीं है। किसी भी बाहरी या अवैध रूप से गठित निकाय को भारत की संप्रभु कार्रवाइयों की वैधता पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है। भारत ने पाकिस्तान को स्पष्ट आईना दिखाते हुए कहा है कि वह अपनी परियोजनाओं को राष्ट्रीय हितों के अनुरूप आगे बढ़ाता रहेगा और किसी भी 'अवैध' अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com