दुश्मनी से दोस्ती तक की डिप्लोमैटिक ड्रामा... 6 साल बाद ट्रंप-शी आमने-सामने, बुसान में होगी मुलाकात

Donald Trump Xi Jinping Meeting: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आज साउथ कोरिया के बुसान में मिल रहे हैं। छह साल बाद होने जा रही ये मुलाकात वैश्विक संतुलन तय कर सकती है।
Trump and Xi face-to-face after 6 years, diplomatic drama from enmity to friendship, meeting to be held in Busan
ट्रंप-शी की मुलाकात. फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Trump-Jinping Meeting: दुनिया की निगाहें आज साउथ कोरिया के बुसान पर टिकी हैं, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ऐतिहासिक मुलाकात होने जा रही है। दो जानी दुश्मन देशों के इन नेताओं की यह भेंट छह साल बाद हो रही है। भारतीय समयानुसार सुबह 7:30 बजे शुरू होने वाली इस बैठक को 2025 की सबसे अहम कूटनीतिक मुलाकात माना जा रहा है।

ट्रंप, जो अमेरिका फर्स्ट के नारे के लिए जाने जाते हैं, और शी जिनपिंग, जो चीनी सपना को हकीकत बनाने की राह पर हैं दोनों ही अपने-अपने देशों को वैश्विक शक्ति संतुलन के शीर्ष पर देखना चाहते हैं। यही वजह है कि आज की मुलाकात में पुरानी कड़वाहट के साथ-साथ नए अवसरों की गंध भी महसूस की जा रही है।

G20 समिट के दौरान मिले थे आखिरी बार

यह मुलाकात एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) समिट के साइडलाइन्स पर हो रही है। 2019 में जापान के ओसाका में G20 समिट के दौरान आखिरी बार दोनों नेता आमने-सामने आए थे। उस वक्त भी दुनिया की सांसें थम गई थीं, जब ट्रेड वॉर के बीच दोनों ने बातचीत से संकट को थोड़ा शांत करने का रास्ता निकाला था।

2019 की यादें ताजा

29 जून 2019 को जापान के ओसाका में शाम का वक्त था। बाहर बारिश हो रही थी और अंदर दो महाशक्तियों के बीच डील की खुशबू फैल रही थी। ट्रंप ने कहा था कि ट्रेड वॉर से किसी को फायदा नहीं और शी ने हामी भरी थी कि सहयोग ही रास्ता है। उसी मीटिंग ने 'फेज वन डील' की नींव रखी थी। लेकिन कोविड महामारी ने सारे समीकरण बदल दिए और डील अधूरी रह गई। इसके बाद 2020 में ट्रंप चुनाव भी हार गए। फिर उनकी 2024 में वापसी हुई है अब वह वापस अपने नए कार्यकाल में पहली बार जिनपिंग से मिलने जा रहे हैं।

अबकी बार क्या है एजेंडा?

इस बार चर्चा के केंद्र में कई संवेदनशील मुद्दे हैं टैरिफ्स, फेंटेनिल ड्रग संकट, रेयर अर्थ मिनरल्स, रूस-यूक्रेन युद्ध और ताइवान। दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव फिर से चरम पर है। अमेरिका चीन पर अनुचित व्यापार नीतियों का आरोप लगाता है, जबकि चीन अमेरिका पर प्रतिबंधों के ज़रिए अपनी प्रगति रोकने की कोशिश बताता है।

कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं है। ट्रंप के लिए यह अपने नए कार्यकाल की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय परीक्षा है, जबकि शी जिनपिंग के लिए यह मौका है यह दिखाने का कि चीन संवाद से समाधान चाहता है, टकराव से नहीं। अब देखना यह है कि क्या 2019 जैसी एक मुस्कुराहट फिर से जंग की गर्माहट को कम कर पाएगी, या फिर यह बैठक सिर्फ कैमरों की फ्लैश तक ही सीमित रह जाएगी।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com