
ग्रीनलैंड पर ट्रंप की नजर, (डिजाइन फोटो)
Why Trump Wants Greenland: वेनेजुएला के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजर दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ‘ग्रीनलैंड’ पर है। व्हाइट हाउस ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए ‘सभी विकल्पों’ पर विचार कर रहा है, जिससे उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में कूटनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है।
व्हाइट हाउस के ताजा बयान ने उन अटकलों को पुख्ता कर दिया है कि अमेरिका इस विशाल द्वीप को अपने प्रभाव क्षेत्र में लाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। खबर है कि ट्रंप प्रशासन अगले हफ्ते डेनमार्क के अधिकारियों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण (हाई-स्टेक) बैठक करने जा रहा है, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है।
ट्रंप की इस विस्तारवादी नीति पर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से इन धमकियों को तुरंत रोकने की अपील की है। फ्रेडरिकसेन ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका किसी अन्य नाटो (NATO) देश पर सैन्य हमले की योजना बनाता है तो यह सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद से बने 80 साल पुराने ट्रांसअटलांटिक सुरक्षा संबंधों का अंत होगा।
उनका कहना है कि अमेरिका की इस तरह की किसी भी आक्रामक पहल से वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था बुरी तरह हिल जाएगी और अंतरराष्ट्रीय संतुलन बिगड़ सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की इच्छा के पीछे कई ठोस वजहें गिनाई हैं जिनमें सबसे बड़ी वजह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा बताई जा रही है।
मिसाइल डिफेंस सिस्टम
ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति मिसाइल हमलों की समय रहते पहचान और रोकथाम के लिए बेहद अहम है। यह द्वीप उत्तरी अमेरिका और आर्कटिक क्षेत्र के बीच स्थित है, जो अर्ली वार्निंग सिस्टम के लिहाज से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
दुर्लभ खनिज संसाधन
ग्रीनलैंड में बड़ी मात्रा में दुर्लभ और कीमती खनिज पाए जाते हैं, जो भविष्य की सैन्य तकनीक, ऊर्जा और हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए बेहद जरूरी हैं।
रूस और चीन की गतिविधियों पर चिंता
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ग्रीनलैंड के आसपास रूसी और चीनी जहाजों की बढ़ती मौजूदगी अमेरिका के लिए संभावित खतरा बन सकती है।
पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी दबदबा
ट्रंप चाहते हैं कि पूरा पश्चिमी गोलार्ध पूरी तरह वॉशिंगटन के प्रभाव और नियंत्रण में रहे।
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ग्रीनलैंड आकार में जर्मनी से लगभग छह गुना बड़ा है लेकिन यहां की आबादी मात्र 56,000 के करीब है। यह ग्रीनलैंड, आइसलैंड और ब्रिटेन के बीच के समुद्री रास्ते (GIUK Gap) में स्थित है। यह क्षेत्र उत्तरी अटलांटिक तक पहुंच को नियंत्रित करने के साथ-साथ व्यापार और जहाजों की निगरानी के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक है।






