परमाणु पनडुब्बियों से रूस की घेराबंदी, ट्रंप के आदेश से दुनियाभर में मचा हड़कंप

US Russia War: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला करते हुए रूस की सीमा के पास दो परमाणु पनडुब्बियां तैनात करने का आदेश जारी किया है। इस कार्रवाई से पूरी दुनिया में चिंता फैल गई है।
परमाणु पनडुब्बियों से रूस की घेराबंदी, ट्रंप के आदेश से दुनियाभर में मचा हड़कंप
परमाणु पनडुब्बियों से रूस की घेराबंदी
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वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए रूस के समीप दो परमाणु पनडुब्बियां तैनात करने का आदेश दिया है। यह कदम रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव द्वारा दिए गए सीधे अल्टीमेटम के बाद उठाया गया है। मेदवेदेव ने चेतावनी देते हुए कहा था कि हर अल्टीमेटम अमेरिका के साथ युद्ध की दिशा में एक कदम है। रूस इजरायल या ईरान जैसा देश नहीं है जो चुपचाप सहन करेगा। ट्रंप को 'स्लीपी जो' (जो बाइडेन) की तरह नहीं बनना चाहिए।

ट्रंप ने मेदवेदेव के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "उसे अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए। वह अभी भी सोचते है कि वह राष्ट्रपति है, लेकिन वह एक खतरनाक रास्ते पर चल रहे है।" साथ ही, ट्रंप ने रूस और राष्ट्रपति पुतिन से अपनी निराशा जाहिर की। उन्होंने आगे कहा, "अगर जवाब स्पष्ट है, तो फैसला आज ही क्यों न हो? अब और देरी नहीं होनी चाहिए।"

रूस को यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए मिला था अल्टीमेटम

मेदवेदेव की यह टिप्पणी ट्रंप के उस बयान के जवाब में सामने आई, जिसमें उन्होंने रूस को यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए महज 10 दिन का समय दिया था। इससे पहले, ट्रंप ने 50 दिनों की अवधि बताई थी, लेकिन अब उन्होंने इसे घटाकर 10 दिन कर दिया है। क्रेमलिन ने ट्रंप के उस बयान को गंभीरता से लिया है, जिसमें उन्होंने पनडुब्बियों की तैनाती का जिक्र किया था।

तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाएं बढ़ी

बता दें कि ट्रंप द्वारा रूस के पास दो परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती और मेदवेदेव के भड़काऊ बयानों के कारण वैश्विक तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।इतना ही नहींं इसके साथ ही तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाएं भी और बढ़ गई हैं। यह परिस्थिति 1962 के क्यूबा मिसाइल संकट की याद दिलाती है, जब अमेरिका और सोवियत संघ परमाणु युद्ध के किनारे पर खड़े थे। विश्लेषकों का मानना है कि अब कोई भी छोटी सी गलत चाल बड़े पैमाने पर टकराव को जन्म दे सकती है। सवाल यह उठता है कि क्या यह सिर्फ एक रणनीतिक दबाव का हिस्सा है या दुनिया एक भयावह युद्ध की ओर बढ़ रही है?

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