बांग्लादेश में हिंदुओं को खुली धमकी: 'मकर संक्रांति मनाई तो अंजाम बुरा होगा', जमात-ए-इस्लामी का नया फरमान

Makar Sankranti News: बांग्लादेश में कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी ने हिंदुओं को मकर संक्रांति मनाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है। जिसके बाद से अल्पसंख्यकों में भारी दहशत है।
Hindus in Bangladesh receive open threats: 'Celebrate Makar Sankranti and face dire consequences', a new decree from Jamaat-e-Islami
बांग्लादेश में मकर संक्रांति पर रोक, फोटो (सो. एआई डिजाइन)
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Bangladesh Hindu Festival News In Hindi: पड़ोसी देश बांग्लादेश में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं अल्पसंख्यक समुदायों विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और धमकियों का सिलसिला तेज होता जा रहा है।

ताजा मामले में, कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी ने हिंदुओं के प्रमुख त्योहार मकर संक्रांति, जिसे वहां स्थानीय स्तर पर 'शक्रेन' कहा जाता है अब उसको निशाना बनाया है। संगठन ने हिंदू समुदाय को चेतावनी दी है कि यदि इस अवसर पर सार्वजनिक उत्सव मनाया गया तो इसके परिणाम गंभीर होंगे।

संगीत और पतंगबाजी पर 'फतवा'

जमात-ए-इस्लामी के नेताओं ने सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर मुनादी के माध्यम से यह फरमान जारी किया है। उन्होंने संगीत बजाने, पतंगबाजी और किसी भी प्रकार के सार्वजनिक उत्सव को 'गैर-इस्लामी' करार दिया है। संगठन का कहना है कि ये गतिविधियां इस्लामी मूल्यों का उल्लंघन करती हैं। इस खुली धमकी के बाद ढाका, चटगांव और सिलहट जैसे बड़े शहरों में रहने वाले हिंदू परिवारों में भारी डर है और कई लोग अब घरों के भीतर ही सादगी से त्योहार मनाने को मजबूर हैं।

सदियों पुरानी परंपरा पर खतरा मकर

संक्रांति या शक्रेन बांग्लादेश में सदियों से 14 जनवरी को पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है। पतंगबाजी और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस उत्सव की मुख्य पहचान रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में कट्टरपंथी संगठनों द्वारा इसका लगातार विरोध किया जा रहा है। पिछले साल भी ढाका और चटगांव में उत्सव मना रहे लोगों पर हमले हुए थे।

दिसंबर में हिंसा का तांडव

दिसंबर 2025 में बांग्लादेश में सांप्रदायिक हिंसा ने भयावह रूप ले लिया जिससे हिंदू समुदाय की नाजुक स्थिति एक बार फिर उजागर हो गई। बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद के अनुसार, अकेले दिसंबर महीने में सांप्रदायिक हिंसा की कम से कम 51 घटनाएं दर्ज की गईं। इन घटनाओं में 10 हिंदुओं की हत्या कर दी गई, जबकि लूटपाट और आगजनी के 23 मामले सामने आए।

इसके अलावा झूठे ईशनिंदा के आरोप लगाकर कई लोगों को प्रताड़ित किया गया। दीपू चंद्र दास, अमृत मंडल और बजेंद्र बिस्वास जैसी जघन्य हत्याओं ने न सिर्फ पूरे समुदाय को झकझोर कर रख दिया बल्कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर गंभीर चिंता भी पैदा कर दी है।

यूनुस सरकार पर उठते सवाल

लगातार हो रही इन हिंसात्मक घटनाओं और कट्टरपंथियों के बढ़ते दुस्साहस ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अल्पसंख्यकों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें सुरक्षा देने में विफल रहा है, जिससे कट्टरपंथी बेखौफ होकर अपनी विचारधारा थोप रहे हैं।

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