हिंदुओं पर हमले सामान्य...अल्पसंख्यकों की रक्षा में यूनुस फेल, भारत और BJP पर लगाने लगे आरोप

Hindus in Bangladesh: बांग्लादेश सरकार हमलों को सामान्य अपराध बता रही है, लेकिन 18 दिनों में छह हिंदुओं की हत्या ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Attack on Hindu in Bangladesh
खोकोन दास, मोहम्मद यूनुस (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Attack on Hindu in Bangladesh: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 18 दिनों में बांग्लादेश में छह हिंदुओं की हत्या की गई है, जबकि एक हिंदू विधवा महिला के साथ दुष्कर्म की घटना भी सामने आई है। हालांकि बांग्लादेश की सरकार ने सामान्य आपराध की घटना करार दिया है।

बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार ने विशेष रूप से खोकोन दास की हत्या को लेकर भारत में उठ रहे सवालों और आरोपों को खारिज किया है। बांग्लादेश का कहना है कि इस मामले को सांप्रदायिक रंग देना गलत है और यह एक सामान्य आपराधिक घटना थी। सरकार के अनुसार, भारत में बीजेपी सहित कुछ राजनीतिक दलों और हिंदू संगठनों ने दावा किया कि खोकोन दास की हत्या एक हिंसक इस्लामी भीड़ ने की, लेकिन पुलिस जांच में यह बात सही नहीं पाई गई।

भारत-बांग्लादेश में बढ़ा तनाव

भारत में कई जगहों पर इन हमलों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हुए हैं। इसी नाराजगी का असर खेल जगत तक भी पहुंचा, जहां आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान के खिलाफ विरोध हुआ। हालात ऐसे बने कि अंततः उन्हें आईपीएल से बाहर कर दिया गया। इससे भारत और बांग्लादेश के बीच खेल संबंधों पर भी असर पड़ता दिखाई दे रहा है।

लूट पाट के दौरान हुई हत्या

पुलिस के मुताबिक, खोकोन दास ने इलाज के दौरान अपने हमलावरों की पहचान की थी। इसके बाद तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया और प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि हत्या का मकसद लूट था, न कि सांप्रदायिक हिंसा। बांग्लादेश सरकार ने यह भी दावा किया कि मृतक के परिवार के सदस्यों ने सांप्रदायिक एंगल से इनकार किया है और हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग एक साथ शोक मना रहे हैं तथा न्याय की मांग कर रहे हैं।

हालांकि, इस दावे के उलट खोकोन दास की पत्नी सीमा दास ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा था कि उनका किसी से कोई विवाद नहीं था और वे शांति से रह रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पति को अचानक निशाना बनाया गया और हमलावर मुस्लिम थे। बांग्लादेश सरकार भले ही इन घटनाओं को सामान्य अपराध बता रही हो, लेकिन लगातार हो रही हिंसक घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा गंभीर मुद्दा

गौरतलब है कि 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास, 24 दिसंबर को अमृत मंडल, 29 दिसंबर को बिजेंद्र विश्वास, 3 जनवरी को खोकोन दास और 5 जनवरी को राणा प्रताप बैरागी और शरत चक्रवर्ती मणि की हत्या हुई। इन घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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