कैश फॉर जॉब मामले में SC से पार्थ चटर्जी को राहत, चार्ज फ्रेमिंग के लिए ट्रायल कोर्ट को निर्देश

West Bengal: स्कूल भर्ती घोटाले में CBI द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार मामले में पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और अन्य आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जानिए क्या है मामले में नया अपडेट।
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पार्थ चटर्जी, फोटो: सोशल मीडिया
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Cash For Job Scam: पश्चिम बंगाल में चर्चित स्कूल भर्ती घोटाले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और अन्य सहआरोपियों को अंतरिम राहत दी है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी करे, और उसके बाद दो महीनों के अंदर गवाहों की गवाही पूरी की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने पार्थ चटर्जी सहित सभी आरोपियों को जमानत मंजूर की है, लेकिन उनकी रिहाई तीन महीने बाद ट्रायल कोर्ट द्वारा निर्धारित बेल बॉन्ड पर होगी। यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार से संबंधित एफआईआर से जुड़ा है।

4 हफ्ते में तय किए जाएं आरोप

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को सख्त निर्देश दिए हैं कि चार सप्ताह के भीतर आरोप तय किए जाएं और उसके बाद दो महीने के भीतर सभी मुख्य गवाहों की गवाही पूरी कर ली जाए। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली पीठ ने जमानत देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि आरोपियों की रिहाई तीन महीने बाद ही संभव होगी और वह ट्रायल कोर्ट द्वारा तय किए गए जमानती बॉन्ड पर निर्भर होगी।

ED केस में भी पहले मिल चुकी है बेल

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच किए जा रहे समान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 13 दिसंबर 2024 को पार्थ चटर्जी को जमानत दी थी। हालांकि, उस जमानत का प्रभाव 1 फरवरी 2025 से होना था। अब इसी तरह की व्यवस्था CBI केस में भी अपनाई गई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का आदेश दिया है और फिर तीन महीने बाद रिहाई का रास्ता खुलने की बात कही है।

क्या है स्कूल जॉब घोटाला

स्कूल जॉब घोटाला पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा भ्रष्टाचार मामला है। आरोप है कि स्कूलों में सहायक शिक्षक और अन्य पदों पर नियुक्तियों के बदले भारी मात्रा में रिश्वत ली गई थी। इस मामले में पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलकों में भूचाल ला दिया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने शिक्षा मंत्री रहते हुए अवैध नियुक्तियों को बढ़ावा दिया और निजी लाभ के लिए नियमों को ताक पर रखा।

CBI इस मामले की आपराधिक जांच कर रही है, जबकि ED इसके वित्तीय पहलुओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में जुटी है। दोनों एजेंसियों ने अब तक कई गिरफ्तारियां की हैं और करोड़ों रुपये की संपत्तियों का पता लगाया है, जो कथित रूप से इस घोटाले से जुड़ी हैं।

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