
पश्चिम बंगाल की राजनीति में जुबानी जंग (फोटो- सोशल मीडिया)
Abhishek Banerjee vs Sukanta Majumdar: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जुबानी जंग अब बेहद तीखे और व्यक्तिगत स्तर पर पहुंच गई है। तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने जोरदार पलटवार किया है। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने अभिषेक बनर्जी को लेकर एक ऐसा बयान दिया है जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने न केवल टीएमसी नेता की दिमागी हालत पर सवाल उठाए, बल्कि दिल्ली पुलिस और पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए उन पर करारा तंज कसा है।
शनिवार को सुकांत मजूमदार ने कहा कि जब अभिषेक बनर्जी चुनाव आयोग गए थे और उन्हें वोटर लिस्ट के संशोधन की सच्चाई पता चली, तब से वे परेशान हैं। मजूमदार ने चुटकी लेते हुए कहा कि वे ऐसी बातें इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं लग रही। उन्होंने पुराने किस्से को याद दिलाते हुए कहा कि अभिषेक एक बार दिल्ली गए थे और वहां से चप्पल छोड़कर भाग खड़े हुए थे। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि दिल्ली पुलिस लठ्ठ बजाती है, वह बंगाल पुलिस की तरह मेज के नीचे नहीं छिपती।
सुकांत मजूमदार ने दावा किया कि अभिषेक चाहे जितनी यात्राएं कर लें, टीएमसी का गायब होना तय है। बंगाल में हिंदू और अन्य धर्म के लोग अब एकजुट हो रहे हैं, जिसके चलते आने वाले चुनाव में टीएमसी को ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर घूमना पड़ेगा। उन्होंने अभिषेक के ‘भूतों का रैंप वॉक’ वाले बयान का मजाक उड़ाते हुए कहा कि आयोग ने 24 लाख नाम हटाए हैं, जिनमें से टीएमसी सिर्फ 3 लोगों को लेकर आई। यह प्रतिशत ना के बराबर है। उन्होंने कहा कि अगर बनर्जी को बांग्ला लिखने बैठा दिया जाए, तो एक पेज में ही कई गलतियां निकल आएंगी, जबकि ड्राफ्ट लिस्ट तो गलतियां सुधारने के लिए ही होती है।
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इससे पहले अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग मतदाता सूची की विसंगतियों को दूर करने में फेल रहा है। उन्होंने साफ कहा कि अगर अंतिम सूची में गड़बड़ी मिली तो पार्टी उसे स्वीकार नहीं करेगी और कानूनी लड़ाई लड़ेगी। उनका कहना है कि चुनावों में वोट चोरी ईवीएम से नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट के जरिए होती है। अभिषेक ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आक्रामक रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि बैठक में वे अपना आपा खोने लगे थे। बनर्जी ने चुनौती दी कि अगर हिम्मत है तो आयोग को उस बैठक की फुटेज जारी करनी चाहिए।






