
भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल। इमेज-सोशल मीडिया
BJP MLA Anti Muslim Statement : पश्चिम बंगाल विधानसभा का बजट सत्र इन दिनों तीखी बहसों और राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बना हुआ है। हाल ही में बीजेपी विधायक अग्निमित्रा पॉल द्वारा मदरसों की सरकारी फंडिंग और मुस्लिम समुदाय को लेकर दिए गए एक बयान ने सदन के भीतर और बाहर भारी विवाद खड़ा कर दिया है। उनके इस बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है, जिससे राज्य की सियासत में उबाल आ गया है।
बजट सत्र के दौरान चर्चा में भाग लेते हुए अग्निमित्रा पॉल ने राज्य सरकार द्वारा मदरसों को दिए जाने वाले अनुदान पर सवाल उठाए। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि वाम मोर्चा के समय मदरसा शिक्षा का बजट 472 करोड़ रुपये था, जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर 4000 करोड़ रुपये से अधिक कर दिया है। उन्होंने सवाल किया कि आवंटन में बारह गुना वृद्धि के बावजूद मुस्लिम समुदाय से डॉक्टर, इंजीनियर या वैज्ञानिक क्यों नहीं निकल रहे हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि इस फंडिंग के बावजूद वहां से अपराधी पैदा हो रहे हैं। उनके इस शब्द ने सदन में हंगामा खड़ा कर दिया।
अग्निमित्रा के इस बयान पर राज्य के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय इस देश की संपत्ति है, अपराधी नहीं। दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने हस्तक्षेप किया और अग्निमित्रा पॉल के बयान के विवादित हिस्से को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। राज्य मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी ने इस बयान को असंवैधानिक करार दिया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि ऐसी सोच रखने वालों को देश से बाहर कर देना चाहिए और अग्निमित्रा को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए।
वर्षों से तृणमूल कांग्रेस ने अल्पसंख्यक समाज का बेशर्मी से सिर्फ़ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया है और जानबूझकर उनके समुदायों को वास्तविक विकास और अवसरों से वंचित रखा है। सच्चाई यह है कि सचर कमेटी की सिफ़ारिशों को भी सुविधानुसार नज़रअंदाज़ कर दिया गया। मैं राज्य के कैबिनेट मंत्री… pic.twitter.com/2SagEz3hIf — Agnimitra Paul BJP (@paulagnimitra1) February 6, 2026
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यह विवाद केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि बंगाल की राजनीति में गहरे ध्रुवीकरण को भी दर्शाता है, जहां बीजेपी सरकार पर तुष्टिकरण और फंड के दुरुपयोग का आरोप लगा रही है। टीएमसी इसे अल्पसंख्यक समुदाय का अपमान बता रही है। इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा और विकास के नाम पर दी जाने वाली सरकारी सहायता पर राजनीतिक बहस छेड़ दी है।






