
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह।
West Bengal Politics : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने 5 फरवरी को 4.06 लाख करोड़ का अंतरिम बजट विधानसभा में पेश किया है। वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा प्रस्तुत बजट राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। विश्लेषक इसे बजट से ज्यादा चुनावी घोषणापत्र मान रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह बजट मुख्य रूप से महिलाओं, युवाओं और सरकारी कर्मचारियों को लक्षित करता है। विपक्षी दलों का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस ने बजट के माध्यम से अपना चुनावी एजेंडा परोस दिया है। भाजपा इसे वोट बैंक की राजनीति और तुष्टीकरण से जोड़कर देख रही है।
भाजपा शासित राज्यों में लाड़ली बहना जैसी योजनाओं की सफलता को देखते हुए ममता सरकार ने लक्ष्मी भंडार योजना में 500 रुपये की वृद्धि का ऐलान किया है। अब सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपये और एससी-एसटी वर्ग की महिलाओं को 1700 रुपये मासिक सहायता मिलेगी।
भाजपा द्वारा बेरोजगारी के मुद्दे पर लगातार निशाना साधे जाने के बाद राज्य सरकार ने बांग्ला युवा साथी योजना की घोषणा की है। इसके तहत 21 से 40 वर्ष के बेरोजगार युवाओं को नौकरी मिलने तक या अधिकतम पांच साल के लिए 1500 रुपये मासिक भत्ता दिया जाएगा। यह योजना 15 अगस्त से लागू होगी। बशर्ते टीएमसी सत्ता में वापस आए।
लंबे समय से केंद्रीय दर पर महंगाई भत्ते की मांग कर रहे सरकारी कर्मचारियों के लिए 4 प्रतिशत डीए बढ़ोतरी की घोषणा की गई है। यह कदम भाजपा के एक बड़े चुनावी मुद्दे की हवा निकालने की रणनीति है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों के मानदेय में 1000 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। उनकी मृत्यु पर परिवार को 5 लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान है। आशा कार्यकर्ताओं को भी 1000 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। नागरिक स्वयंसेवकों और ग्रीन पुलिस के वेतन में भी इजाफा किया गया है।
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भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक मामलों और मदरसों के लिए 5700 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। उद्योग और वाणिज्य के लिए मात्र 1,400 करोड़ रुपये रखे गए हैं। उन्होंने इसे असंतुलित प्राथमिकताओं का उदाहरण बताया।
भाजपा के डबल इंजन सरकार के दावे के मुकाबले ममता बनर्जी-कोरबो, लड़बो, जीतबो का नारा देकर अपनी स्थानीय नेता वाली छवि मजबूत कर रही हैं।






