कौन हैं संध्या राय? जिन्होंने राहुल गांधी की बोलती बंद कर दी, 'पावर एनकाउंटर' की पूरी इनसाइड स्टोरी पढ़ें

Who Is Sandhya Rai : संसद में पीठासीन सभापति संध्या राय ने राहुल गांधी को बजट चर्चा के बीच बोलने से रोका है। दूसरी बार की सांसद संध्या राय कांग्रेस सांसद राहुल को बोलने से रोककर वायरल हो गईं।
Who is Sandhya Rai? The woman who silenced Rahul Gandhi? Read the full inside story of the Power Encounter
संध्या राय और राहुल गांधी।
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Sandhya Rai And Rahul Gandhi : संसद की कार्यवाही आज सुबह शुरू होने के साथ सरगर्मियां तेज थीं। विपक्ष ने एकजुट होकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की रणनीति तैयार कर ली थी। आरोप था कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है।

सदन में जब शोर-शराबा बढ़ा तो ओम बिरला की अनुपस्थिति में पीठासीन सभापति की कुर्सी संभाली मध्य प्रदेश के भिंड से सांसद संध्या राय ने। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि एक दूसरी बार की सांसद, सदन के सबसे कद्दावर विपक्षी नेता के सामने इतनी मजबूती से खड़ी हो जाएंगी।

शशि थरूर की जगह राहुल गांधी हो गए खड़े

दोपहर के ठीक 2 बज रहे थे और बजट पर चर्चा शुरू होनी थी। अपनी बारी का इंतजार कर रहे शशि थरूर खड़े ही हुए थे कि अचानक राहुल गांधी अपनी सीट पर खड़े हो गए। राहुल ने सीधे चेयर की ओर देखते हुए कहा कि स्पीकर साहब ने खुद वादा किया था कि बजट चर्चा से पहले मुझे अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। अब वे अपने वादे से पीछे क्यों हट रहे हैं? मैं बस यह जानना चाहता हूं कि क्या मुझे अपने मुद्दे रखने की अनुमति है या नहीं?

बिना हिचकिचाहट कड़ा रुख अपनाया

सदन में मौजूद लोग यह देख रहे थे कि पल्लू तले शालीन दिखने वाली संध्या राय क्या प्रतिक्रिया देती हैं। संध्या राय ने बिना किसी हिचकिचाहट कड़ा रुख अपनाया और स्पष्ट लहजे में कहा कि मेरे पास आपका कोई लिखित नोटिस नहीं है। बिना तय प्रक्रिया के यहां कोई चर्चा नहीं होगी। आपको बजट पर बोलना है तो बोलिए, वरना आप बैठ जाइये। एक जूनियर सांसद द्वारा दी गई इस दोटूक नसीहत ने राहुल गांधी को भी मौन रहने पर मजबूर कर दिया।

सिर पर पल्लू और इरादों में फौलाद

संसद में संध्या राय की पहचान उनके सिग्नेचर लुक से होती है। वे सदन में शायद इकलौती ऐसी महिला सभापति हैं जो हमेशा सिर पर पल्लू रखकर कुर्सी पर बैठती हैं। माथे पर बड़ी बिंदी, सूती साड़ियों की सादगी और चेहरी की गंभीरता उन्हें एक पारंपरिक भारतीय महिला का अक्स देती है, लेकिन जब वे ऑर्डर-ऑर्डर पुकारती हैं तो दिग्गजों को भी अनुशासन का पाठ पढ़ना पड़ता है। उनकी यह सॉफ्ट पावर आज सोशल मीडिया पर उन्हें वायरल कर रही है।

10 साल की उम्र में शादी और संघर्ष का सफर

संध्या राय की जीवन यात्रा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। 1984 का वह दौर जब वे महज 5वीं कक्षा में थीं, तब 10 साल की मासूम उम्र में उनकी शादी कर दी गई थी। उन्हें अपनी शादी की रस्में तक याद नहीं हैं। 5 साल बाद जब उनका गौना हुआ तो किस्मत से उन्हें ऐसा ससुराल मिला, जिसने रूढ़ियों को तोड़कर उनके सपनों को पंख दिए। उन्होंने न केवल सोशियोलॉजी में एमए किया, बल्कि कानून की पढ़ाई कर वकील भी बनीं। राजनीति में उनका आना भी इत्तेफाक था। वे तो सरकारी नौकरी करना चाहती थीं, लेकिन आरएसएस और बीजेपी से जुड़े उनके पति सुमन राय ने उन्हें आगे बढ़ाया। साल 2000 में जब अम्बाह मंडी अध्यक्ष की सीट महिला आरक्षित हुई, तो 26 साल की संध्या ने पहला चुनाव जीता। इसके बाद 2003 में विधायक बनीं और फिर 2019 में भिंड की पहली महिला सांसद बनकर इतिहास रच दिया।

बाल विवाह की शिकार बेटी देश के भविष्य का फैसला कर रहीं

आज जब वे लोकसभा अध्यक्ष के पैनल में शामिल होकर देश की सर्वोच्च पंचायत चलाती हैं तो यह उस सामाजिक बदलाव का प्रतीक है, जहां एक बाल विवाह की शिकार बेटी देश के भविष्य का फैसला कर रही है। वैसे, विपक्ष अक्सर उन पर पक्षपात के आरोप लगाता है। मगर, संध्या राय हर बार संसदीय नियमों की किताब दिखाकर मुस्कुराते हुए इन विवादों को शांत कर देती हैं। राजनीति की बिसात पर सादगी और अनुशासन का यह संगम आज की तारीख में बीजेपी के लिए एक बड़ा हथियार साबित हो रहा है।

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