पंजाब के लिए भाजपा का प्लान तैयार...इस राज्य के मॉडल को बनाएगी हथियार, जनता मौके देने को तैयार?

BJP News : पंजाब में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी काफी सक्रिय हैं। उनकी सक्रियता को भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा। वहीं, आम आदमी पार्टी भी उनकी काट निकालने में जुटी है।
BJP plan for Punjab is ready...will use the model of this state as a weapon, is the public ready to give it a chance?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी।
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BJP Plan For Punjab Election : पंजाब की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) एक ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां वह अपने वजूद की नई इबारत लिखने की कोशिश में है। हिंदी पट्टी के राज्यों में राज करने वाली बीजेपी के लिए पंजाब का किला अब भी अभेद्य बना हुआ है। साल 2020 में अकाली दल से नाता टूटने के बाद पार्टी ने अकेले चुनाव लड़कर देख लिया, लेकिन 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों में उसे करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। अब पार्टी ने पंजाब फतह के लिए हरियाणा मॉडल का सहारा लिया है।

बीजेपी ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पंजाब में सक्रिय किया है। पिछले एक साल से सैनी पंजाब के उद्योगपतियों, धार्मिक संगठनों और कलाकारों के बीच पैठ बना रहे हैं। वे रैलियों में पगड़ी बांधते हैं और पंजाबी में भाषण देकर लोगों का दिल जीतने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी का तर्क है कि जिस तरह 2014 से पहले हरियाणा में पार्टी का आधार शून्य था और आज वहां लगातार तीसरी बार सरकार है, वही करिश्मा पंजाब में भी दोहराया जा सकता है।

आम आदमी पार्टी का काउंटर प्लान

नायब सैनी की बढ़ती सक्रियता ने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) को असहज कर दिया है। आप अब हरियाणा मॉडल को असफल साबित करने की तैयारी में है। पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने हरियाणा में बेरोजगारी और बुनियादी ढांचे की कमी का मुद्दा उठाते हुए बीजेपी को घेरा है। आप का प्लान है कि वह हरियाणा सरकार की विफलताओं को उजागर कर पंजाब की जनता को आगाह करे, ताकि बीजेपी के दावों की हवा निकाली जा सके।

चुनौतियां और सामाजिक समीकरण

बीजेपी की सबसे बड़ी कमजोरी पंजाब में जमीनी कार्यकर्ताओं (बूथ लेवल वर्कर्स) का न होना है। भले ही कैप्टन अमरिंदर सिंह और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे दिग्गज नेता बीजेपी में शामिल हो गए हों, लेकिन वे अपना गढ़ तक नहीं बचा पाए। कैप्टन अमरिंदर खुद कह चुके हैं कि बिना अकाली दल के गठबंधन के पंजाब में जीतना नामुमकिन है। वर्तमान में बीजेपी दलितों (खासकर रविदासिया समुदाय) और जट्ट सिखों को साधने के लिए सामाजिक समीकरण बिठाने में जुटी है। 2027 के चुनावों में अभी समय है, लेकिन सवाल वही है कि क्या बीजेपी बिना किसी करिश्माई स्थानीय चेहरे और मजबूत जमीनी पकड़ के पंजाब की सत्ता का ख्वाब पूरा कर पाएगी?

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