यूपी पुलिस मौत की कर रही थी सौदेबाजी...तरीका जानकर उड़ जाएंगे होश, दरोगा समेत 13 पुलिसकर्मी निलंबित

UP Police : यूपी में हादसों की विवेचना के नाम पर पुलिस के भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। बिना बीमा और लाइसेंस केस में गाड़ी और ड्राइवर बदलकर बीमा कंपनियों से क्लेम वसूल लिया जा रहा था।
UP police were bargaining for death... you will be shocked to know the method, 13 policemen including the inspector were suspended
यूपी पुलिस। इमेज-एआई
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UP Police Corruption News : उत्तर प्रदेश में देवीपाटन मंडल से खाकी को दागदार करने वाला ऐसा गिरोह सामने आया है, जिसे सुनकर आम इंसान का कानून पर से भरोसा डगमगा जाए। यहां पुलिस अफसर न्याय करने के बजाय फिक्सर की भूमिका निभा रहे थे। सड़क हादसों में मौत के बाद मिलने वाले मुआवजे को भ्रष्टाचार का जरिया बना लिया गया था।

देवीपाटन मंडल के गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती जिले में पुलिस का ऐसा निराला खेल चल रहा था, जहां कागजों पर सच को झूठ और झूठ को सच बनाया जा रहा था। दुर्घटनाओं के मामलों में विवेचना (जांच) के नाम पर पुलिस के कुछ अफसरों ने बीमा कंपनियों के साथ करोड़ों की धोखाधड़ी की साजिश रची।

क्या था भ्रष्टाचार का तरीका?

पुलिस का यह खेल मुख्य रूप से दो तरीकों से चल रहा था। इसमें गाड़ियों की अदला-बदली एक तरीका था। इसमें सड़क दुर्घटना किसी ऐसी गाड़ी से होता, जिसका बीमा नहीं था तो पुलिस रिश्वत लेकर उस गाड़ी की जगह किसी ऐसी गाड़ी को कागजों में शामिल करती, जिसका बीमा होता था। दूसरा तरीका ड्राइवर का झोल था। इसमें सड़क हादसा करने वाले ड्राइवर के पास लाइसेंस नहीं होता तो उसकी जगह वैध लाइसेंस वाले व्यक्ति को फर्जी ड्राइवर बनाकर खड़ा किया जाता था। यह किया जाता था, ताकि बीमा कंपनियों से मोटा क्लेम वसूला जा सके। कायदे से ड्राइवर के पास लाइसेंस न हो या गाड़ी का बीमा न हो तो मुआवजे की राशि संबंधित व्यक्ति को जेब से देनी होती है। मगर, पुलिस ने रिश्वत के लालच में बीमा कंपनियों की तिजोरी पर डाका डलवा दिया।

रडार पर 16 अफसर

इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब इंश्योरेंस कंपनियों ने आईजी रेंज अमित पाठक से शिकायत की। आईजी ने जब एसआईटी गठित कर जांच कराई तो परते उधड़ती चली गईं। जांच में 16 विवेचक (जांच अधिकारी) दोषी मिले। इनमें से 1 इंस्पेक्टर और 12 सब इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया गया। भ्रष्टाचार की इस आग में सबसे ज्यादा बहराइच के 8 पुलिसकर्मी झुलसे हैं। गोंडा के 2 और श्रावस्ती के 3 पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिरी है। 3 ऐसे सब इंस्पेक्टर, जो दूसरे जिलों में जा चुके थे, उनके खिलाफ भी संबंधित जिलों को निलंबन के आदेश भेज दिए गए हैं।

मामलों की होगी दोबारा जांच

आईजी अमित पाठक ने बताया कि यह मामला बेहद गंभीर है क्योंकि यह उन एक्सीडेंट्स से जुड़ा है, जिनमें लोगों की जान गई थी। शोक संतप्त परिवारों को न्याय दिलाने के बजाय पुलिस अधिकारी इस बात में लगे थे कि कैसे कागजों में हेरफेर कर पैसा कमाया जाए। आईजी अमित पाठक ने बताया कि यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है। हम सुनिश्चित कर रहे कि अब इन सभी 13 मामलों की दोबारा सही तरीके से जांच हो और असली दोषियों को सजा मिले।

आगे क्या?

दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। आईजी ने स्पष्ट किया कि यह शुरुआत है। एसआईटी की जांच जारी है। जैसे-जैसे तथ्य सामने आएंगे, अन्य दोषियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। सभी पुराने मुकदमों को दोबारा खोलने के आदेश दिए गए हैं, ताकि सही वाहन और सही चालक की पहचान हो सके।

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