योगी सरकार नहीं छोड़ेगी रेप केस में बरी मोइद खान को, दलित नाबालिग की मां ने भी कही बड़ी बात

Ayodhya Bhadasra Rape Case : उत्तर प्रदेश के अयोध्या में नाबालिग से गैंगरेप मामले में सबूतों के अभाव में सपा नेता मोइद खान के बरी होने के बाद उसका घर गिराने के लिए यूपी सरकार घिर गई है।
The Yogi government will not release Moin Khan, who was acquitted in the rape case, and the Dalit minor mother also made a significant statement
सपा नेता मोइद खान और सीएम योगी।
Published on: 
Updated on: 

UP Government : नाबालिग दलित लड़की के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में बीते 28 जनवरी को विशेष पॉक्सो कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया। डीएनए रिपोर्ट के आधार परस जहां नौकर राजू खान को उम्रकैद की सजा मिली, वहीं मुख्य आरोपी के रूप में चर्चित सपा नेता मोइद खान को बा-इज्जत बरी कर दिया गया। लेकिन यह फैसला किसी अंत की तरह नहीं, बल्कि एक नए संघर्ष की शुरुआत की तरह नजर आ रहा है।

इस मामले में योगी सरकार का रुख शुरू से ही बेहद हमलावर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाते हुए सख्त कार्रवाई का वादा किया था। इसी के तहत मोइद खान के बहुमंजिला कॉम्प्लेक्स पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया गया था। अब कोर्ट से उसे राहत मिलने के बाद सरकार इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। सरकार का मानना है कि इस जघन्य अपराध में न्याय सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।

वह बाहर आया तो हमें खतरा है

कोर्ट के फैसले के बाद सबसे ज्यादा डरी हुई वह मां है, जिसने अपनी मासूम बच्ची के लिए न्याय की लड़ाई शुरू की थी। पीड़िता की मां का कहना है कि मोइद खान के बरी होने से उनकी और उनके परिवार की जान को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। मां ने सांसद अवधेश प्रसाद पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मोइद को बचाने के लिए साजिश रची गई है। पीड़िता के परिवार को डर है कि रसूखदार आरोपी जेल से बाहर आने के बाद उन पर दबाव बना सकता है या बदला ले सकता है। पीड़िता की मां ने कहा कि जब तक वह सलाखों के पीछे था, हमें लगा हम सुरक्षित हैं। अब वह बरी हो गया है तो हमारी रातों की नींद उड़ गई है।

डीएनए रिपोर्ट और कानूनी पेंच

अदालत ने फैसले में डीएनए जांच को मुख्य आधार बनाया। रिपोर्ट में राजू खान का डीएनए तो पीड़िता के साथ मैच हुआ (पॉजिटिव), लेकिन मोइद खान की रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसी आधार पर उन्हें बरी किया गया। वैसे, पीड़िता का परिवार और सरकारी वकील इस दलील पर अड़े हैं कि मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए और वे इस अधूरे न्याय के खिलाफ हाईकोर्ट की चौखट खटखटाएंगे।

सियासी रार और रिहाई का इंतजार

भले कोर्ट ने मोइद खान को बरी कर दिया हो, लेकिन अन्य कानूनी औपचारिकताओं या लंबित मामलों के चलते वह अब भी जेल में ही हैं। विपक्षी दलों ने जहां बुलडोजर कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया था, वहीं अब कोर्ट के फैसले ने भाजपा और सपा के बीच जुबानी जंग को और तेज कर दिया है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com