
शारिक साठा पर चलेगा चाबुक, फोटो- सोशल मीडिया
Sambhal Violence Mastermind Shariq Saatha Kurki: उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा के मास्टरमाइंड शारिक साठा पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा का मुख्य आरोपी साठा फिलहाल फरार है और दुबई से अपनी गतिविधियां चला रहा है। आज, बुधवार 21 जनवरी को पुलिस उसके दीपा सराय स्थित घर और अन्य चल-अचल संपत्तियों को कुर्क करने जा रही है।
न्यायालय ने 13 जनवरी को शारिक साठा की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद पुलिस ने साठा की संपत्तियों का विस्तृत डेटा तैयार किया और अब बुधवार को इस कुर्की की प्रक्रिया को अंजाम दिया जा रहा है। दीपा सराय स्थित उसके घर पर कुर्की का स्थाई वारंट और उद्घोषणा नोटिस पहले ही चस्पा किए जा चुके हैं, जिनकी मियाद पूरी हो चुकी है। गौरतलब है कि पूर्व में गैंगस्टर एक्ट 14ए के तहत उसकी 267 वर्गमीटर भूमि पहले ही कुर्क की जा चुकी है।
शारिक साठा एक कुख्यात अपराधी है, जिसके खिलाफ हत्या, आर्म्स एक्ट और संभल हिंसा से जुड़े कुल 69 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर का ऑटो लिफ्टर भी है। कोतवाली पुलिस ने उसके खिलाफ चार लोगों की हत्या के अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं और वह इन सभी मामलों में फरार चल रहा है। जांच में यह खुलासा हुआ है कि साठा ने अपने गुर्गों- गुलाम और मुल्ला अफरोज के माध्यम से हिंसा को निर्देशित किया था।
पुलिस की जांच और एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट के अनुसार, शारिक साठा दुबई से सक्रिय है और पिछले कई सालों से अपराध की दुनिया में अपनी पैठ बनाए हुए है। पुलिस का दावा है कि उसने संभल हिंसा के दौरान हथियारों की आपूर्ति करने और भीड़ को भड़काने में मुख्य भूमिका निभाई थी। उसे ‘प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर’ (भगोड़ा) घोषित किया जा चुका है और उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी है। अब प्रशासन इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने का प्रयास कर रहा है ताकि उसे विदेश से पकड़कर भारत लाया जा सके।
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संभल हिंसा तब भड़की थी जब स्थानीय अदालत के आदेश पर शाही जामा मस्जिद का सर्वे किया जा रहा था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुए हिंसक टकराव में पत्थरबाजी, आगजनी और गोलीबारी हुई थी। इस घटना में चार युवकों की मौत हो गई थी और प्रशासनिक अफसरों सहित कुल 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। पुलिस का मानना है कि यह कोई तात्कालिक गुस्सा नहीं, बल्कि एक संगठित साजिश थी जिसका मुख्य सूत्रधार शारिक साठा था।






