
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, फोटो- सोशल मीडिया
Avimukteshwaranand Reply Magh Mela: प्रयागराज माघ मेले में ‘शंकराचार्य’ पद को लेकर छिड़ा विवाद अब कानूनी दांव-पेंचों में उलझ गया है। मेला प्रशासन द्वारा भेजे गए नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की टीम ने 8 पन्नों का विस्तृत प्रत्युत्तर दाखिल किया है। इसमें प्रशासन के दावों को खारिज करते हुए इसे करोड़ों हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ बताया गया है।
प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर उनके ‘ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य’ होने पर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में स्वामी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अंजनी कुमार मिश्रा ने 8 पन्नों का जवाब अंग्रेजी में भेजा है। इस पत्र में कहा गया है कि प्रशासन द्वारा भेजा गया नोटिस न केवल अपमानजनक है, बल्कि यह सनातन धर्मावलंबियों की भावनाओं को आहत करने वाला है। जवाब में स्पष्ट किया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही विधि सम्मत शंकराचार्य हैं।
वकील पीएन मिश्रा ने जवाब के माध्यम से प्रशासन की कानूनी दलीलों पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार:
• पट्टाभिषेक की तिथि: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पट्टाभिषेक 12 अक्टूबर 2022 को संपन्न हो चुका था।
• अदालती आदेश: प्रशासन जिस सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दे रहा है, वह 17 अक्टूबर 2022 का है, जिसमें भविष्य के पट्टाभिषेक पर रोक लगाई गई थी। चूंकि स्वामी का अभिषेक पहले हो चुका था, इसलिए उन पर यह रोक लागू नहीं होती।
• SC द्वारा संबोधन: 21 सितंबर 2022 के एक आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ‘शंकराचार्य’ के रूप में संबोधित किया है। स्वामी की टीम का तर्क है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इस पद से स्वीकार किया है, तो प्रशासन का नोटिस भेजना अदालत की अवमानना के समान है।

इस मामले में उस समय नाटकीय स्थिति पैदा हो गई जब अविमुक्तेश्वरानंद की टीम जवाब देने के लिए सेक्टर-4 स्थित मेला प्राधिकरण के दफ्तर पहुंची। सूत्रों के अनुसार, उस समय कार्यालय में कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नोटिस लेने के लिए मौजूद नहीं था। इसके बाद अनुयायियों ने जवाब की प्रतियों को दफ्तर के गेट पर ही चिपका दिया। इसके साथ ही ईमेल के जरिए भी यह जवाब प्रशासन को भेज दिया गया है।
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जवाब में प्रतिद्वंद्वी पक्ष पर भी हमला बोला गया है। वकील पीएन मिश्रा ने दावा किया कि वासुदेवानंद ने गलत हलफनामा (Affidavit) देकर आदेश प्राप्त किया था, जिसके खिलाफ पहले ही याचिका दायर की जा चुकी है। स्वामी की टीम ने चेतावनी दी है कि जिन अधिकारियों ने नोटिस जारी कर भ्रम की स्थिति पैदा की है और करोड़ों हिंदुओं की आस्था का अपमान किया है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Ans: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नया शंकराचार्य बनाए जाने पर विवाद है। कई संतों ने कहा कि नियमों के आधार पर नियुक्ति नहीं हुई है। संन्यासी अखाड़े ने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वर को ज्योतिष पीठ का नया शंकराचार्य मानने से इनकार कर दिया था।
Ans: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक प्रमुख हिंदू संत हैं। उनका जन्म 15 अगस्त 1969 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के ब्राह्मणपुर गांव में हुआ था, और उनका मूल नाम उमाशंकर उपाध्याय था। उन्होंने वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की शिक्षा ग्रहण की है।
Ans: प्रशासन ने पूछा था कि मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के बावजूद वे खुद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य कैसे बता रहे हैं।






