
राजा भैया-भानवी सिंह, फोटो- सोशल मीडिया
Raja Bhaiya Bhanvi Singh Dispute: उत्तर प्रदेश के चर्चित राजनेता और कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी सिंह के बीच जारी पारिवारिक कलह में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट को इस मामले की सुनवाई में तेजी लाते हुए आगामी चार महीनों के भीतर अपना फैसला सुनाने का निर्देश दिया है।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की कुंडा विधानसभा सीट से बाहुबली विधायक राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी सिंह के बीच चल रहे कानूनी विवाद ने अब एक निर्णायक मोड़ ले लिया है। रविवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा आदेश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट को निर्देशित किया है कि वह इस हाई-प्रोफाइल मामले पर अगले चार महीनों के भीतर अपना अंतिम फैसला सुनाए। यह आदेश उन याचिकाओं के संदर्भ में आया है जो इस विवाद के लंबित होने के कारण कानूनी प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग कर रही थीं।
राजा भैया और भानवी सिंह के बीच का यह विवाद पिछले काफी समय से सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों के बीच चल रहे इस मतभेद ने कानूनी लड़ाई का रूप ले लिया था, जिसकी सुनवाई दिल्ली की अदालतों में चल रही है। जानकारी के अनुसार, यह मामला मुख्य रूप से वैवाहिक विवाद और अन्य कानूनी पहलुओं से जुड़ा है। चूंकि यह मामला लंबे समय से दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित था, इसलिए अब सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए इसे समयबद्ध तरीके से निपटाने की आवश्यकता पर बल दिया है। शीर्ष अदालत का मानना है कि ऐसे मामलों का लंबे समय तक खिंचना दोनों पक्षों के लिए मानसिक और सामाजिक रूप से तनावपूर्ण होता है।
रघुराज प्रताप सिंह, जिन्हें उनके समर्थक ‘राजा भैया’ के नाम से बुलाते हैं, उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक बड़ा और प्रभावशाली चेहरा हैं। वे प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से लगातार सात बार विधायक चुने गए हैं और अपनी दबंग छवि के साथ-साथ ‘बाहुबली’ नेता के रूप में जाने जाते हैं। वे उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। उनकी पत्नी भानवी सिंह के साथ उनके विवाद ने न केवल उनके निजी जीवन बल्कि उनके राजनीतिक रसूख को भी खबरों के केंद्र में ला दिया है। इस कानूनी विवाद के चलते उनके समर्थकों और विरोधियों, दोनों की नजरें अदालती फैसलों पर टिकी हुई हैं।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई चार महीने की डेडलाइन के बाद अब दिल्ली हाईकोर्ट को इस मामले में त्वरित कार्रवाई करनी होगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश इस बात का संकेत है कि न्यायपालिका अब हाई-प्रोफाइल पारिवारिक विवादों में हो रही देरी को कम करना चाहती है।
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अब अगले 120 दिनों के भीतर आने वाला फैसला न केवल राजा भैया और भानवी सिंह के निजी भविष्य को तय करेगा, बल्कि इसका प्रभाव उनकी सार्वजनिक छवि पर भी पड़ना तय है। अब सभी की निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट की अगली कार्यवाहियों पर हैं, जहां दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाना है।






