
अखिलेश यादव ने कमिश्नर पर लगाए आरोप, फोटो- सोशल मीडिया
Magh Mela 2026 Allegations by SP: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित माघ मेला 2026 अब धार्मिक आस्था के साथ-साथ तीखी राजनीति का अखाड़ा बन गया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए दुर्व्यवहार के मामले में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रशासन और भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने प्रयागराज मंडल की मंडलायुक्त IAS सौम्या अग्रवाल की प्रेस वार्ता के बाद सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के राज में मेले के नाम पर ‘पचासों हजार की महा-रकम’ कमीशन के रूप में गटकने का खेल चल रहा है। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को कमिश्नर की जगह ‘कमीशनर’ की नई पोस्ट बना देनी चाहिए क्योंकि इस गोरखधंधे में अधिकारियों और भाजपाइयों की मिलीभगत है। उनके अनुसार, इसी भ्रष्टाचार की वजह से उन साधु-संतों को सम्मान नहीं मिल पा रहा है जो मेले की शोभा होते हैं।
अखिलेश यादव ने प्रशासन पर साधु-संतों के साथ आपत्तिजनक, अपमानजनक और हिंसक दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जो भी मेले की बदइंतजामी के खिलाफ आवाज उठाता है, वह सरकार और ‘संगीधिकारियों’ के निशाने पर आ जाता है। सपा चीफ ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि मेला क्षेत्र का वह ‘धृतराष्ट्र’ कौन है, जिसे सब कुछ दिखते हुए भी वह अनजान बना हुआ है।
अखिलेश के साथ-साथ सपा के अन्य सांसदों ने भी सरकार पर निशाना साधा है। सुल्तानपुर सांसद रामभुआल निषाद ने आरोप लगाया कि इस सरकार में शंकराचार्य भी उत्पीड़ित हैं और उनके साथ बर्बरता की जा रही है। अविमुक्तेश्वरानंद पर शंकराचार्य होने का नोटिस जारी करने पर सपा के बलिया के सांसद सनातन पांडे ने कहा कि इस मामले में बोलेंगे तो बात बहुत आगे बढ़ जाएगी। उन्होंने बनारस के मणिकर्णिका घाट मामले का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सरकार मंदिरों का इस्तेमाल अपने स्वार्थ के लिए करती है और जरूरत न होने पर उन्हें तोड़ दिया जाता है। वहीं, बलिया सांसद सनातन पांडेय ने इसे एक अलोकतांत्रिक सरकार करार दिया।
विवाद बढ़ता देख मेलाधिकारी ऋषिराज ने प्रेस वार्ता कर प्रशासन का पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने किसी भी साधु-संत का अपमान नहीं किया है। उनके अनुसार, स्वामी और उनके समर्थकों ने बैरिकेडिंग तोड़कर संगम नोज पर आने की कोशिश की थी, जिससे भगदड़ की स्थिति पैदा हो सकती थी। भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ही प्रशासन को कदम उठाना पड़ा। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुख्य स्नान पर्व पर वाहनों की अनुमति नहीं थी और अन्य संतों ने शांतिपूर्वक स्नान किया है।
शंकराचार्य जी के मामले में ख़ुद सफ़ाई नहीं दे पा रहे तो एआई से ही सफ़ाई दिलवा दें। pic.twitter.com/sGV10kFup4 — Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) January 20, 2026
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प्रयागराज का माघ मेला, जहाँ लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे हैं, अब विपक्षी दलों के निशाने पर है। जहाँ एक ओर करोड़ों की संख्या में लोग गंगा घाटों पर आरती और स्नान के लिए उमड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य को नोटिस जारी किए जाने और प्रशासन के कथित ‘रूखे’ व्यवहार ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। यह विवाद आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है क्योंकि विपक्ष इसे सीधे तौर पर ‘धर्म और भ्रष्टाचार’ से जोड़कर पेश कर रहा है।






