
अमेरिका फ्रांस वाइन टैरिफ युद्ध, कॉन्सेप्ट फोटो
US France Trade War: अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच कूटनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर है। ट्रंप ने मंगलवार को फ्रांस की मशहूर वाइन और शैम्पेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की सीधी धमकी दी है। इस विवाद की मुख्य जड़ ट्रंप द्वारा गाजा के पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ है जिसमें शामिल होने से मैक्रों ने कथित तौर पर इनकार कर दिया है।
ट्रंप ने तल्ख लहजे में कहा कि मैक्रों उनके ‘बोर्ड ऑफ पीस‘ का हिस्सा बनने को तैयार नहीं हैं। ट्रंप ने तंज कसते हुए यहां तक कह दिया कि वैसे भी कोई उन्हें (मैक्रों को) नहीं चाहता क्योंकि वे जल्द ही पद से बाहर होने वाले हैं। बता दें कि मैक्रों का कार्यकाल मई 2027 में समाप्त हो रहा है और वे तीसरी बार चुनाव नहीं लड़ सकते। ट्रंप का कहना है कि यदि फ्रांस ‘दुश्मनी’ दिखाता है तो वे उनके शराब बाजार पर भारी टैक्स थोप देंगे जिसके बाद फ्रांस खुद इस बोर्ड में शामिल होने को मजबूर हो जाएगा।
हमास और इजरायल के बीच जारी युद्ध के बाद ट्रंप ने गाजा के पुनर्निर्माण और निवेश लाने के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के गठन का ऐलान किया है। इस बोर्ड के लिए ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे दिग्गज विश्व नेताओं को भी निमंत्रण भेजा है।
फ्रांस का अल्कोहलिक ड्रिंक्स मार्केट लगभग 69 बिलियन डॉलर का है, जिसमें वाइन की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत है। अमेरिका फ्रेंच शराब का सबसे बड़ा खरीदार है, विशेषकर कोगनैक और शैम्पेन के लिए फ्रांस पूरी तरह अमेरिकी बाजार पर निर्भर है। ट्रंप ने इससे पहले मार्च 2025 में भी यूरोपीय संघ की टैक्स नीतियों को ‘मनमाना’ बताते हुए इसी तरह के टैरिफ की धमकी दी थी।
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फ्रांस की शराब को दुनिया में लग्जरी और स्टेटस सिंबल माना जाता है। इसके पीछे मुख्य कारण ‘Terroir’है, जिसका अर्थ है कि वहां की मिट्टी, मौसम और सैकड़ों साल पुरानी परंपरा ही उस शराब का स्वाद तय करती है। फ्रांस में शराब बनाने के अत्यंत सख्त नियम हैं, जिसकी बराबरी अमेरिका जैसे देश भी नहीं कर पाते। अब 200% टैरिफ लगने से यह प्रीमियम उत्पाद अमेरिकी बाजार में बहुत महंगे हो जाएंगे, जिससे फ्रांसीसी अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है।






