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‘आप शंकराचार्य कैसे?’ अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला प्रशासन का नोटिस, 24 घंटे में देना होगा जवाब
Prayagraj Magh Mela ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर पूछा है कि वे खुद को 'ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य' कैसे बता रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए 24 घंटे में जवाब मांगा गया है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, फोटो- नवभारत
Avimukteshwaranand Notice Prayagraj: संगम की रेती पर चल रहे माघ मेले में छिड़ा विवाद अब कानूनी और प्रशासनिक मोड़ ले चुका है। मौनी अमावस्या पर हुए हंगामे के बाद धरने पर बैठे अविमुक्तेश्वरानंद को मेला प्राधिकरण ने कड़ा नोटिस थमा दिया है,। इसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के पुराने आदेशों का जिक्र करते हुए उनके ‘शंकराचार्य’ संबोधन की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
प्रयागराज माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक औपचारिक नोटिस भेजकर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। इस नोटिस में सबसे प्रमुख सवाल उनके पद को लेकर किया गया है। प्रशासन ने पूछा है कि वे खुद को ‘ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य’ के रूप में कैसे प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि यह मामला अभी भी माननीय हाईकोर्ट में विचाराधीन है। प्राधिकरण ने इस संबंध में अविमुक्तेश्वरानंद को अपना पक्ष रखने के लिए केवल 24 घंटे का समय दिया है। यह कदम तब उठाया गया है जब अविमुक्तेश्वरानंद मौनी अमावस्या के दिन से ही प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं और अपने शिविर के बाहर विरोध स्वरूप बैठे हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का हवाला
नोटिस की कानूनी बुनियाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक पूर्व आदेश पर टिकी है। प्रशासन ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि जब तक हाईकोर्ट ज्योतिष्पीठ के पट्टाभिषेक के संबंध में कोई अग्रिम या अंतिम आदेश पारित नहीं करता है, तब तक कोई भी धर्माचार्य आधिकारिक रूप से खुद को इस पीठ का शंकराचार्य नहीं बता सकता और न ही इस रूप में पट्टाभिषेकित हो सकता है। वर्तमान में यह पद कानूनी विवादों के घेरे में है, और प्रशासन का तर्क है कि विचाराधीन मामले के दौरान इस गरिमामय पद का उपयोग करना नियमों के विरुद्ध हो सकता है।
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मौनी अमावस्या का विवाद क्या है?
इस प्रशासनिक कार्रवाई की जड़ें मौनी अमावस्या के दिन हुए एक विवाद से जुड़ी हैं। सूत्रों के अनुसार, उस दिन उत्तर प्रदेश सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता और अन्य मेला अधिकारियों के साथ अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की तीखी बहस हुई थी। आरोप है कि इस दौरान अधिकारियों ने शिष्यों के साथ मारपीट भी की। इस घटना से आहत होकर अविमुक्तेश्वरानंद ने संगम में पवित्र स्नान करने से मना कर दिया और विरोध में उतर आए। उन्होंने तब से ही अपने शिविर में प्रवेश नहीं किया है और खुले में धरने पर बैठे हैं।
माफी मांगने और स्नान की मांग पर अड़े अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि प्रशासन का व्यवहार अपमानजनक था। उनकी स्पष्ट मांग है कि जब तक संबंधित अधिकारी खुद आकर उनसे माफी नहीं मांगते और उन्हें ससम्मान संगम स्नान नहीं कराते, तब तक वे अपना धरना समाप्त नहीं करेंगे। उन्होंने घोषणा की है कि वे माघ मेले की पूर्णिमा तक इसी तरह शिविर के बाहर बैठे रहेंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भविष्य में भी जब वे प्रयागराज आएंगे, तो शिविर के बाहर ही रहेंगे और स्नान नहीं करेंगे जब तक उन्हें वह सम्मान नहीं मिलता जिसकी वे अपेक्षा करते हैं।
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प्रयागराज का माघ मेला फिलहाल अपने चरम पर है। महाशिवरात्रि पर अखाड़ों के अंतिम स्नान के साथ इस मेले का समापन होगा। वर्ष 2026 के इस मेले में अब तक करोड़ों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा चुके हैं और हर दिन लाखों की भीड़ संगम तट पर उमड़ रही है। ऐसे समय में एक बड़े धर्माचार्य और प्रशासन के बीच यह टकराव सुरक्षा और व्यवस्था की दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण बन गया है। जहां एक तरफ लाखों लोग मोक्ष की कामना लेकर आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस नोटिस ने धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
Prayagraj magh mela administration notice avimukteshwaranand shankaracharya title controversy
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