
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
Arabian Sea Boiling Water: अरब सागर के गहरे पानी में अचानक उठी लहरों और रहस्यमयी बुलबुलों ने तटीय सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। महाराष्ट्र के पालघर और गुजरात तट के निकट मछुआरों ने पानी में ऐसी हलचल देखी है, मानो समुद्र का पानी उबल रहा हो। इस डरावने दृश्य के बाद प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
पालघर जिला आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की ओर से सोमवार को साझा की गई जानकारी ने समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने वाली एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। मछुआरों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो में समुद्र के एक बड़े हिस्से में तीव्र हलचल और बड़े-बड़े बुलबुले निकलते देखे गए हैं। स्थानीय चश्मदीदों के अनुसार, समुद्र की सतह का व्यवहार सामान्य से बिल्कुल अलग और चिंताजनक था।
पालघर जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, विवेकानंद कदम ने इस घटना को ‘अत्यंत असामान्य’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की गतिविधि केवल सतही लहरों का परिणाम नहीं हो सकती। कदम ने तत्काल प्रभाव से समुद्री और औद्योगिक विशेषज्ञ एजेंसियों को इस मामले की गहन जांच करने का आग्रह किया है। प्रशासन का मानना है कि यह घटना किसी बड़े खतरे का संकेत भी हो सकती है, इसलिए बिना किसी देरी के वैज्ञानिक विश्लेषण आवश्यक है।
विशेषज्ञ इस घटना के पीछे तीन मुख्य संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं:
समुद्र तल से गैस रिसाव: समुद्र के नीचे प्राकृतिक गैस के भंडार या किसी अज्ञात स्रोत से मीथेन जैसी गैसों का रिसाव पानी में बुलबुले पैदा कर सकता है।
औद्योगिक पाइपलाइन डैमेज: इस क्षेत्र में कई तेल और गैस पाइपलाइनें बिछी हुई हैं। आशंका है कि किसी पाइपलाइन में दरार आने से उच्च दबाव वाली गैस बाहर निकल रही हो।
विवर्तनिक (Tectonic) गतिविधि: समुद्र तल के नीचे होने वाली छोटी भू-वैज्ञानिक हलचलें या भूकंपीय गतिविधियां भी पानी के तापमान और दबाव में बदलाव ला सकती हैं, जिससे पानी ‘उबलता’ हुआ प्रतीत होता है।
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चूंकि यह क्षेत्र प्रमुख समुद्री परिवहन मार्ग और मछली पकड़ने का मुख्य केंद्र है, इसलिए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। विवेकानंद कदम ने बताया कि जिला प्रशासन ने समुद्री प्राधिकरणों (Maritime Authorities) के साथ समन्वय शुरू कर दिया है। एहतियात के तौर पर, उस विशिष्ट क्षेत्र से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों और मछली पकड़ने वाली नौकाओं को दूरी बनाए रखने और अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह घटना प्राकृतिक है या मानव-निर्मित। आपदा प्रबंधन की टीमें ओएनजीसी (ONGC) और तटरक्षक बल (Coast Guard) जैसी एजेंसियों के संपर्क में हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उस क्षेत्र में उनकी कोई सक्रिय पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई है। जब तक विशेषज्ञों की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तटीय समुदायों में भय और जिज्ञासा का माहौल बना हुआ है।






