शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ FIR का आदेश, नाबालिगों के यौन शोषण का है आरोप

Prayagraj POCSO Court: प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ नाबालिगों के यौन शोषण के मामले में FIR दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया है। कोर्ट में 2 पीड़ित बच्चे भी पेश किए गए
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, फोटो- सोशल मीडिया
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Shankaracharya Avimukteshwaranand FIR: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ पॉक्सो कोर्ट ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का सख्त आदेश दिया है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी की शिकायत और पीड़ितों के बयानों के आधार पर अब कानूनी कार्यवाही शुरू होगी।

प्रयागराज की विशेष पॉक्सो कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया ने शनिवार को इस संवेदनशील मामले में सुनवाई करते हुए अविमुक्तेश्वरानंद और अन्य आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह फैसला आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दायर शिकायत और पेश किए गए साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए सुनाया है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में प्रयागराज पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट भी पहले ही अदालत को सौंपी जा चुकी है, जिसे कोर्ट ने अपनी कार्यवाही का आधार बनाया। इस आदेश के बाद अब पुलिस को संबंधित धाराओं के तहत औपचारिक मुकदमा दर्ज कर गहराई से जांच करनी होगी।

बंद कमरे में लिए गए पीड़ितों के बयान

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 13 फरवरी को आया था, जब आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत में दो पीड़ित बच्चों को पेश किया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जज ने पूरे पॉक्सो कोर्ट रूम को खाली कराने का आदेश दिया था ताकि बच्चे बिना किसी दबाव के अपनी बात रख सकें। उस समय कमरे में केवल दोनों पक्षों के वकील ही मौजूद थे। बच्चों ने जज के सामने अपने साथ हुए कथित शोषण की पूरी दास्तां सुनाई, जिसे कैमरे के सामने रिकॉर्ड (वीडियोग्राफी) किया गया था। इन बयानों और वादी द्वारा सौंपी गई एक कथित सीडी को कोर्ट ने प्राथमिक साक्ष्य के तौर पर बेहद गंभीरता से लिया है।

आशुतोष ब्रह्मचारी ने लगाए आरोप, जान का खतरा भी बताया

शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने कोर्ट में भावुक होते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई थीं। उन्होंने जज के सामने कहा कि जब से उन्होंने इस मामले को उठाया है, उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। 13 फरवरी को कोर्ट रूम से बाहर निकलते समय वे फूट-फूट कर रो पड़े और उन्होंने दावा किया कि उनकी कार को बम से उड़ाकर उनकी हत्या करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई थी कि केवल न्यायपालिका ही इन मासूमों को इंसाफ दिला सकती है। दूसरी ओर, शंकराचार्य के वकीलों ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है और इसे केवल एक आरोप करार देते हुए मामले की तैयारी के लिए समय मांगा था।

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धार्मिक और कानूनी गलियारों में मची हलचल

शंकराचार्य जैसे उच्च पद पर आसीन व्यक्ति अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ एफआईआर के आदेश ने पूरे देश के धार्मिक और कानूनी हलकों में हड़कंप मचा दिया है। वादी पक्ष का कहना है कि उनके पास ऐसे पुख्ता सबूत हैं जो यह साबित करेंगे कि धर्म की आड़ में मासूमों का शिकार किया गया। कोर्ट ने पिछली सुनवाई पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि कानून के सामने पद की गरिमा से ऊपर पीड़ितों का न्याय है। अब पुलिस विवेचना के दौरान यह साफ होगा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या इस नेटवर्क में कुछ अन्य लोग भी शामिल हैं।

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