संपादकीय: कर्नल सोफिया पर ओछी टिप्पणी, मंत्री विजय शाह को तुरंत बर्खास्त करने की उठी मांग

मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी जैसी भारत की गौरवशाली बेटी पर अत्यंत ओछे शब्दों मैं टिप्पणी की, जिससे हर देशवासी का दिल दुखा है।
कर्नल सोफिया पर विजय शाह की टिप्पणी से आक्रोश, बर्खास्तगी की मांग
विजय शाह और कर्नल सोफिया
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नागपुर: पता नहीं इस तरह के विवेकहीन लोग कैसे मंत्री बन जाते हैं, जिन्हें बोलने की तमीज नहीं रहती और बेछूट मनमानी बकवास करते हैं? ऐसा नेता किस काम का, जो देश और उसके सशख बलों का सम्मान न करें और बेहद घटिया बयानबाजी करें।

मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी जैसी भारत की गौरवशाली बेटी पर अत्यंत ओछे शब्दों मैं टिप्पणी की, जिससे हर देशवासी का दिल दुखा है।

मह के एक कार्यक्रम में मंत्री ने सेना की ओर से ऑपरेशन 'सिंदूर' की जानकारी देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को लक्ष्य करते हुए बेहूदा बात कही। उनका यह रवैया मर्यादाविहीन और अत्यंत अपमान जनक था।

होना तो यह चाहिए था कि इस भाषण की वीडियो लिंक देखकर बीजेपी हाईकमांड तुरंत विजय शाह को मंत्री पद से बर्खास्त करता, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मंत्री की शर्मनाक टिप्पणी का स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि मंत्री की भाषा गटरछाप है। ऐसा बयान व्यक्तिगत मानहानि ही नहीं, बल्कि संस्थानों और सामाजिक ताने-बाने पर भी चोट है।

मंत्री का यह कहना कि कर्नल कुरैशी आतंकियों की बहन हैं, अत्यंत अवांछित, अपमानजनक, नफरती और अलगाववादी भावना को बढ़ावा देने वाली बात है। यह देश की एकता, संप्रभुता व अखंडता के लिए खतरा है। इसलिए मंत्री के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज हो।

इसके लिए 4 घंटे का समय दिया गया कि या तो आदेश का पालन करें या सुप्रीम कोर्ट जाएं। कोई बहाना नहीं सुना जाएगा। यदि एफआईआर दाखिल नहीं की गई, तो डीजीपी पर अदालत की अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।

हाईकोर्ट का सख्त रवैया देखते हुए पुलिस ने महू के मानपुर थाने में मंत्री के खिलाफ गैरजमानती धाराओं में केस दर्ज किया। बीएनएस की ऐसी धाराओं में मामला दर्ज हुआ, जिनमें उम्रकैद भी हो सकती है। मंत्री पर धर्म, जाति और भाषा के आधार पर समाज में वैमनस्य व दुर्भावना फैलाने, भारत की एकता, अखंडता व संप्रभुता को खतरे में डालने का कृत्य करने के आरोप हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि सेना इस देश की शायद अंतिम संस्था है, जहां ईमानदारी, अनुशासन और बलिदान का अद्वितीय उदाहरण मिलता है। मंत्री ने गटर जैसी भाषा का इस्तेमाल किया। यह किसी अफसर नहीं, बल्कि सेना को नीचा दिखाने का प्रयास है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

केवल धार्मिक पहचान के कारण किसी को आतंकवाद से जोड़ना, न केवल नफरत फैलाता है, बल्कि संविधान के खिलाफ है। पीढ़ियों से भारतीय सेना का गौरव बढ़ाने वाले कुरैशी परिवार पर देश को अभिमान है। मंत्री की घटिया टिप्पणी से हर देशवासी का मन आहत हुआ है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा 

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