मोदी सरकार ने नेहरू को बनाया आसान बलि का बकरा...थरूर बोले- पहले PM भारतीय लोकतंत्र के शिल्पकार

Jawaharlal Nehru Controversy: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन देश की हर समस्या के लिए उन्हें अकेले दोषी ठहराना पूरी तरह गलत और अनुचित है।
Shashi Tharoor on Jawaharlal Nehru Controversy
शशि थरूर (Image- Social Media)
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Shashi Tharoor on Modi Government: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, “मैं यह नहीं कहूंगा कि मोदी सरकार लोकतंत्र के खिलाफ है, लेकिन वह निश्चित तौर पर नेहरू-विरोधी जरूर है। नेहरू को एक आसान बलि का बकरा बना दिया गया है।”

उन्होंने कहा कि वह भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विचारों और दृष्टिकोण के बड़े प्रशंसक हैं, लेकिन नेहरू की हर सोच और नीति का बिना सवाल उठाए समर्थन करना संभव नहीं है। थरूर ने कहा कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, मगर देश की हर समस्या के लिए उन्हें अकेले जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह गलत और अनुचित है।

नेहरू को बताया भारतीय लोकतंत्र का शिल्पकार

थरूर गुरुवार को केरल विधानसभा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव (KLIBF) के चौथे संस्करण में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि नेहरू भारतीय लोकतंत्र के शिल्पकार थे और उन्होंने इसे मजबूत आधार दिया। अस्थमा और पढ़ने-लिखने की आदत का जिक्र करते हुए अपने लेखक जीवन पर बात करते हुए थरूर ने बताया कि बचपन में अस्थमा की बीमारी के कारण उनका झुकाव किताबों की ओर बढ़ा। उस समय न तो टेलीविजन था और न ही मोबाइल फोन, इसलिए किताबें ही उनकी सबसे करीबी मित्र बन गईं।

थरूर ने पहली किताब कौन सी लिखी?

उन्होंने कहा कि उनका पहला उपन्यास बहुत कम उम्र में लिखा गया था, लेकिन स्याही फैल जाने के कारण वह नष्ट हो गया। श्री नारायणा गुरु की जीवनी उनकी 28वीं पुस्तक है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में पढ़ने की आदत कम हो रही है, लेकिन केरल आज भी पठन संस्कृति में आगे है। थरूर ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1989 में The Great Indian Novel इसलिए लिखा, क्योंकि उस दौर में भारत में व्यंग्य साहित्य लगभग नहीं के बराबर था। युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में कम पन्नों वाली छोटी किताबें अधिक प्रभावशाली हो सकती हैं, क्योंकि लोगों के पास पढ़ने का समय घटता जा रहा है।

मोदी सरकार ने कब-कब किया नेहरू का जिक्र

  • चीन सीमा / 1962 युद्ध बहस कब- दिसंबर 2022 (शीतकालीन सत्र), फरवरी 2023 (बजट सत्र) LAC पर चीन के साथ तनाव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष ने 1962 की हार का हवाला देते हुए नेहरू की विदेश और रक्षा नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
  • कश्मीर और अनुच्छेद 370 कब- 5/6 अगस्त 2019 (विशेष सत्र/राज्यसभा-लोकसभा), फरवरी 2020 (बजट सत्र) अनुच्छेद 370 हटाने की बहस में नेहरू काल के फैसलों को ऐतिहासिक चूक बताते हुए मौजूदा कश्मीर समस्या की जड़ कहा गया।
  • कश्मीर मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में ले जाना कब- फरवरी 2021 (बजट सत्र), मार्च 2023 (बजट सत्र) सरकार ने कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने के फैसले का जिक्र करते हुए नेहरू सरकार पर मुद्दे के अंतरराष्ट्रीयकरण का आरोप लगाया।
  • आर्थिक नीतियां / सार्वजनिक क्षेत्र (लाइसेंस-परमिट राज) कब- फरवरी 2021 (बजट सत्र), फरवरी 2022 (बजट सत्र) निजीकरण और आर्थिक सुधारों की बहस के दौरान नेहरू युग की समाजवादी नीतियों और लाइसेंस-परमिट राज को विकास में बाधक बताया गया।
  • परिवारवाद की बहस कब- फरवरी 2023 (बजट सत्र), दिसंबर 2023 (शीतकालीन सत्र) कांग्रेस पर परिवारवाद के आरोप लगाते हुए नेहरू-गांधी परिवार का बार-बार उल्लेख किया गया और राजनीतिक विरासत पर सवाल उठाए गए।
  • रक्षा आधुनिकीकरण कब- दिसंबर 2021 (शीतकालीन सत्र), दिसंबर 2022 (शीतकालीन सत्र) रक्षा खरीद और सैन्य आधुनिकीकरण पर चर्चा में कहा गया कि नेहरू काल में सेना के आधुनिकीकरण को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

इससे पहले कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य शशि थरूर केरल के वायनाड स्थित सुल्तान बथेरी में आगामी राज्य विधानसभा चुनावों की रणनीति पर चर्चा के लिए KPCC की ‘लक्ष्य 2026’ नेतृत्व शिविर में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा था कि वह कभी पार्टी लाइन से नहीं हटे। थरूर ने कहा, “मेरा सवाल है कि किसने कहा कि मैंने पार्टी लाइन छोड़ी है। जब मैंने अलग-अलग मुद्दों पर अपनी राय रखी, तब भी पार्टी और मैं एक ही लाइन पर थे।” उन्होंने कहा कि वह पिछले 17 वर्षों से पार्टी में हैं और सहकर्मियों के साथ उनके अच्छे संबंध रहे हैं। किसी तरह की अचानक गलतफहमी की जरूरत नहीं है।

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