सिर्फ 30 रुपये बचे थे जेब में, 6 साल स्टोर रूम में रहीं, आज करोड़ों की मालकिन हैं फराह खान

Farah Khan Struggle Story: फराह खान की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है। पिता की मौत के बाद उनके पास सिर्फ 30 रुपये बचे थे। मेहनत के दम पर आज फराह आज करोड़ों की मालकिन और बॉलीवुड की टॉप डायरेक्टर हैं।
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फराह खान (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
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Farah Khan Birthday Special Story: फराह खान ने अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई है। एक सफल कोरियोग्राफर, निर्देशक और टेलीविजन जज के रूप में उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, उसके पीछे संघर्ष की एक लंबी और दर्दभरी कहानी छिपी है। फराह खान की जिंदगी इस बात की मिसाल है कि हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर हौसला मजबूत हो तो किस्मत बदली जा सकती है।

फराह खान का जन्म 9 जनवरी 1965 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता कामरान खान अपने समय के जाने-माने स्टंटमैन और फिल्म डायरेक्टर थे। एक समय ऐसा भी था जब फराह का परिवार आर्थिक रूप से काफी संपन्न था और उनके घर बॉलीवुड की बड़ी हस्तियों का आना-जाना लगा रहता था। लेकिन एक फिल्म के फ्लॉप होने के बाद उनके पिता की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। इसी सदमे में वे शराब की लत का शिकार हो गए और लीवर फेल होने से उनका निधन हो गया। फराह तब बहुत छोटी थीं और पिता की मौत ने पूरे परिवार को गहरे संकट में डाल दिया।

सलीम खान ने की थी फराह की मदद

पिता के जाने के बाद फराह और उनके भाई साजिद खान को भयानक गरीबी का सामना करना पड़ा। हालात इतने खराब थे कि पिता के अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे। इस मुश्किल घड़ी में सलीम खान ने परिवार की मदद की। फराह ने खुद बताया है कि उनके पास उस समय सिर्फ 30 रुपये थे और उन्हें कई सालों तक स्टोर रूम में रहना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।

माइकल जैक्सन को अपना आइडल मानती थीं फराह

फराह खान को बचपन से डांस का शौक था। वह माइकल जैक्सन को अपना आइडल मानती थीं और उन्हें देखकर डांस सीखा। किस्मत ने तब करवट ली जब फिल्म ‘जो जीता वही सिकंदर’ के सेट पर अचानक कोरियोग्राफर न आने की वजह से फराह को मौका मिला। यहीं से उनके करियर की शुरुआत हुई। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई हिट गानों को कोरियोग्राफ किया और 6 बार फिल्मफेयर अवॉर्ड अपने नाम किया। कोरियोग्राफी में नाम कमाने के बाद फराह ने निर्देशन की दुनिया में कदम रखा। शाहरुख खान के साथ उनकी दोस्ती रंग लाई और फिल्म ‘मैं हूं ना’ ने उन्हें टॉप डायरेक्टर बना दिया।

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