
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Income Tax Infrastructure: केंद्रीय बजट में आयकर स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया। कर धारक को सरकार ने तुरंत कोई राहत नहीं दी है। बजट में कुछ टैक्स कोषों पर बदलाव किए हैं, जैसे कि टीसीएस दरों में कटौती की है। विशेष रूप से शिक्षा, चिकित्सा और विदेश यात्रा के लिए जिससे उपभोक्ता खर्च कम हो सके। कुछ दवाओं पर सरकार ने बुनियादी कर माफ करने की घोषणा की है जिसमें कैंसर की 17 दवाएं शामिल हैं। निश्चित रूप से इससे कैंसर के गंभीर मरीजों को राहत मिलेगी। सरकार ने पूंजीगत निवेश की केंद्रित रणनीति और अवसंरचना के निवेश पर जोर दिया है।
सरकार ने 7 हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की योजना बनाई है और राष्ट्रीय जलमार्गों का विस्तार करने की भी योजना है। इसी तरह देश के सभी जिलों में नौकरीपेशा महिलाओं के लिए हॉस्टल बनाने की योजना है तथा शहरों में लॉजिस्टिक हब्स के विकास की भी दीर्घकालिक योजना पर काम कर रही है। बजट में टेक्नोलॉजी आधारित और रणनीतिक क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया है।
इंडिया सेमी कंडक्टर मिशन 2.0 देश को वैश्विक स्तर पर चिप निर्माण केंद्र बनने की महत्वाकांक्षा को साकार करेगा तथा रेयर अर्थ मिनरल्स और उच्च प्रौद्योगिकी के निर्माण को भी समर्थन दिया है। इससे रोजगार के साथ-साथ निर्यात में भी प्रभावशाली वृद्धि की संभावना है।
सरकार ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस समर्थित कृषि व कुटीर उद्योगों में बड़े पैमाने पर निवेश की योजना बनाई है, जो अंततः अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। बजट में कृषि, ग्रामीण विकास और सामाजिक क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया गया है।
बजट में कृषि क्षेत्र को 1.63 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और उच्च मूल्य वाली फसलों, समर्थन सेवाओं तथा तकनीक आधारित खेती को प्रोत्साहन देने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने ग्रामीण रोजगार योजनाओं के लिए भी बजट में भारी आवंटन किया है। जी राम जी और मनरेगा के लिए निधि को बढ़ाया गया है, जो कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। लेकिन वास्तविक परिवर्तन, वेतन, बाजार उपलब्धता और सिंचाई जैसे मूल चुनौतियों के समाधान से ही हासिल होगा।
साल 2026 के बजट में गृह मंत्रालय को 2.55 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस बजट में सीमा सुरक्षा और आंतरिक जांच क्षमताओं को बेहतर व सुदृढ़ करने की जरूरत पर बल दिया गया है। देश की सुरक्षा चुनौतियों को वित्तीय प्राथमिकता मिली है लेकिन सवाल है, क्या सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों को भी पर्याप्त संसाधन मिल रहे हैं? अगर बजट की मुख्य आलोचनाओं पर ध्यान केंद्रित करें तो यह बजट करदाताओं को स्पष्ट कर राहत देने से बचा है, जो कि मध्यमवर्ग उम्मीद लगाए बैठा था।
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बजट पूंजीगत व्यय पर बुरी तरह से निर्भर है। ऐसे में वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब परियोजनाएं सरकार के अनुमान के मुताबिक समय पर पूरी होंगी। इस बजट की तीसरी प्रमुख आलोचना इस रूप में की जा सकती है कि बजट ने व्यापक सामाजिक चुनौतियों जैसे बेरोजगारी, स्वास्थ्य और शिक्षा में प्रणालीगत सुधार पर विशेष जोर नहीं दिया, जबकि उसकी बहुत जरूरत थी।
वैश्विक अर्थव्यवस्था जिस तरह अनिश्चितता और धीमी वृद्धि दर से जूझ रही है, ऐसे में अगर भारत अमेरिकी टैरिफ का दबाव झेलते हुए अपनी घरेलू मांग मांग और निवेश के बल पर विकास को सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है, तो यह स्वाभाविक ही है। शायद इसलिए लगातार अपना 9वां केंद्रीय बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोई बड़ा ऐलान नहीं किया।
भारत की अर्थव्यवस्था इस समय 7 प्रतिशत सालाना विकास के दर से आगे बढ़ रही है। इस साल का बजट 53.47 लाख करोड़ रुपये का है, जो कि पिछले साल के बजट के मुकाबले 7.1 फीसदी ज्यादा है। इसका मूल लक्ष्य विकास को गति देना, नौकरियां पैदा करने की कोशिशों को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और सामाजिक कल्याण सुनिधित करना है।
लेख-लोकमित्र गौतम के द्वारा






