संपादकीय: पाक-बांग्लादेश की निकटता खतरनाक, 1971 का सच भुलाया जा रहा है!

Pakistan Bangladesh 1971 War : पाकिस्तान बांग्लादेश से नजदीकी बढ़ाकर भारत विरोधी एजेंडे को हवा दे रहा है। 1971 के जख्म भुलाकर क्या ढाका फिर इस्लामाबाद की गोद में बैठ रहा है?
Editorial: The growing closeness between Pakistan and Bangladesh is dangerous; the truth of 1971 is being forgotten!
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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नवभारत डिजिटल डेस्क: पाकिस्तान लगातार बांग्लादेश से निकटता बढ़ा रहा है। भारत से द्वेष रखने वाली ताकतें तो यहां तक चाहती हैं कि दोनों देशों का एकीकरण हो जाए, चीन व पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई इसी तरह की साजिश में लिप्त हैं। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से पाकिस्तान की लगातार कोशिश रही है कि बांग्लादेश में अपना मजबूत प्रभाव क्षेत्र बनाया जाए, क्या बांग्लादेश की नई पीढ़ी भूल गई कि पाकिस्तान की फौज ने वहां की जनता पर कितने जघन्य अत्याचार किए थे और 1971 के युद्ध में पाक को धूल चटाकर भारत ने कैसे स्वतंत्र बांग्लादेश का निर्माण किया था? अब वहीं बांग्लादेश भारत के खिलाफ साजिशें रच रहा है।

वहां हिंदुओं की हत्याएं की जा रही हैं लेकिन वहां की सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं कर रही। मुद्दा यह है कि क्या बांग्लादेश एक बार फिर पाक की गोद में बैठने को तैयार है जो कि उसका शोषणकर्ता रहा है। पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच भाषा और संस्कृति का बहुत बड़ा फर्क है सिर्फ इस्लाम ही उन्हें जोड़ता है।

बांग्लादेश सरकार ने अपनी क्रिकेट टीम को भारत में होने वाले टी-20 क्रिकेट विश्वकप टूर्नमिट में नहीं भेजने का फैसला किया है। भारत से सारे संबंध तोड़ने का वहां की सरकार का प्रयास है। पाकिस्तानी सेना को 1971 में हुई हार की टीस है इसलिए वह बांग्लादेश से इतना निकट संबंध बढ़ा रही है। पाक के फौजी प्रतिनिधि मंडल ने बांग्लादेश का दौरा किया।

चीन भी पाक और बांग्लादेश को एक दूसरे के निकट लाने की साजिश में लिप्त है ताकि भारत की घेराबंदी की जा सके। पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को बांग्लादेश की निर्यातोन्मुख इकोनॉमी की मदद मिल जाएगी। पाकिस्तान की तुलना में बांग्लादेश ने पिछले 55 वर्षों में काफी आर्थिक प्रगति की है जिसकी तारीफ वर्ल्ड बैंक व आईएमएफ ने भी की है।

आपसी सैन्य सहयोग के तहत बांग्लादेश पाकिस्तान से लड़ाकू विमान खरीदने वाला है। वह इसका इस्तेमाल किसके खिलाफ करेगा ? क्या भारत के खिलाफ? यह तो ऐसी बात हुई कि जिस हाथ ने निवाला खिलाया उसी को काटने की सोची जाए। बांग्लादेश की कार्यवाहक सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने तो चीन को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर कब्जा करने की सलाह देते हुए अपना चटगांव पोर्ट इस्तेमाल करने का भी प्रस्ताव रखा था।

बांग्लादेश के घुसपैठिए पहले ही भारत की अर्थव्यवस्था पर बोझ बने हुए हैं, पाकिस्तान, चीन व बांग्लादेश का रवैया देखते हुए भारत को अपने रक्षा बजट में वृद्धि करनी पड़ी है। बांग्लादेश की सेना को भी सोचना होगा कि क्या वह फिर पाकिस्तान की गुलामी करने को तैयार होगी? बांग्लादेश में चुनाव होंगे भी या नहीं? यूनुस की कोशिश चुनाव टालकर अपनी सत्ता मजबूत करने पर रहेगी। पाकिस्तान से बहुत निकटता बढ़ाना बांग्लादेश के लिए आत्मघाती सिद्ध होगा।

लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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