नवभारत विशेष: BJP अध्यक्ष नितिन नबीन के कंधों पर बड़ा दायित्व

Women Reservation: नितिन नबीन के सामने बंगाल, तमिलनाडु सहित कई राज्यों के चुनाव और 2029 की कठिन चुनौती है। परिसीमन, महिला आरक्षण और रोजगार संकट भाजपा की बड़ी परीक्षा होंगे।
Navbharat Special: A big responsibility rests on the shoulders of BJP president Nitin Naveen
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स : सोशल मीडिया )
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नवभारत डिजिटल डेस्क: अटल बिहारी वाजपेयी जब जनसंघ के अध्यक्ष बने थे तब वह 44 साल कुछ दिनों के थे। नितिन नबीन बीजेपी के अध्यक्ष तब बने हैं, जब पार्टी ऐतिहासिक रूप से बहुत मजबूत है। दुनिया में सबसे ज्यादा करीब 5 करोड़ कार्यकर्ताओं वाली भाजपा की आज 240 लोकसभा सीटें हैं और 21 राज्यों में बीजेपी या उसकी अगुआई वाले गठबंधन एनडीए की सरकारें हैं, राज्यसभा में भी बीजेपी के 99 सांसद हैं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नवीन के सामने इस साल बंगाल, तमिलनाडु, असम, पुद्दुचेरी और केरल में विधानसभा चुनाव होंगे। इनमें से असम को छोड़ दें तो किसी भी राज्य में भाजपा के लिए लड़ाई आसान नहीं है। इससे भी ज्यादा भाजपा की चुनौती 2029 के लोकसभा चुनाव होंगे जिसके लिए उन्हें पार्टी को तैयार करना होगा।

ये पिछले कई लोकसभा चुनावों से ज्यादा मुश्किल इसलिए होंगे क्योंकि ये चुनाव ऐसे समय में होंगे, जब देश परिसीमन की प्रक्रिया से गुजर रहा होगा, लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू किया जा रहा होगा। साथ ही बड़ी तादाद में नए वोटर का सामना करना होगा।

अर्थव्यवस्था के आगे बढ़ने के बावजूद रोजगार का दिनोंदिन गहराता संकट मोदी सरकार के लिए एंटी इनकंबेंसी का मुश्किल माहौल तैयार करेगा। संसद से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अनुसार, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों का आरक्षण परिसीमन के बाद लागू होगा।

नितिन नबीन के सामने सबसे कठिन परीक्षा रोजगार संकट और वैश्विक व्यापार में उभरती अनिश्चितताओं के बीच पार्टी- सरकार की विश्वसनीयता को मजबूत बनाए रखने की भी होगी। उन्हें अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाने का एक मकसद 'युवा मतदाता' पर फोकस करना भी है।

इस वर्ष 5 विधानसभाओं के चुनाव

भाजपा के नए अध्यक्ष के तौर पर नितिन नबीन के नाम की औपचारिक घोषणा के बाद, पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें 'मिलेनियल' बताते हुए कहा कि उनमें युवाओं जैसी ऊर्जा और संगठन का वृहद अनुभव है, जो पार्टी के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होगा।

नितिन नबीन का जन्म बीजेपी के जन्म से करीब दो महीने बाद यानी 23 मई 1980 को हुआ था। ऐसे में वह 45 वर्ष से कुछ ज्यादा की हो चुकी भाजपा के बारहवें राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। हालांकि 45 साल के नितिन नबीन को बीजेपी की कमान मिलने के बाद उनकी कम उम्र की चर्चा हो रही है लेकिन बीजेपी से पहले जनसंघ में भी कम उम्र के अध्यक्ष हुए हैं।

नितिन नबीन को सबसे पहले यह समझना होगा कि रोजगार पर बहस अब 'सरकारी नौकरी बनाम प्राइवेट नौकरी' तक सीमित नहीं रही। भारत का बड़ा हिस्सा लो-क्वालिटी जॉब्स, गिग वर्क, ठेकेदारी और अनियमित आय की तरफ खिसक चुका है। हाल में हमने देखा है कि आस-पड़ोस के देशों में युवाओं की निराशा कितनी तेजी से 'राजनीतिक गुस्से' में बदलती है।

यही वजह है कि अध्यक्ष होने के नाते उन्हें हर राज्य चुनाव में रोजगार को 'केन्द्र-बिंदु' बनाना पड़ेगा, वरना यह मुद्दा विपक्ष के हाथ में हथियार बन जाएगा। रोजगार के साथ साथ वैश्विक व्यापार भी उनके कार्यकाल की एक बड़ी चुनौती होगी। इसलिए उनके सामने दोहरी रणनीति होगी-घरेलु उद्योग तथा निर्यात दोनों को साथ साधना।

यदि आयात सस्ता हुआ तो घरेलू कुटीर उद्योग दवेगा; यदि संरक्षण बहुत बढ़ा तो निर्यात बाजारों में नुकसान होगा। उन्हें स्किलिंग को भी उद्योग से जोड़वाने का प्रयास करना होगा 'स्किल इंडिया' जैसे शब्द तभी असर करेंगे जब लोकल उद्योग में सीधी भर्ती और अप्रेंटिसशिप बढ़े। हालांकि किसी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीधे नीति नहीं बनाते, लेकिन वे तय करते हैं कि पार्टी किस मुद्दे को प्राथमिकता देगी।

नितिन नबीन को अगले 12-18 महीनों में रोजगार और व्यापार को 'चुनावी भाषण' से निकालकर संगठन की दिनचर्या बनाना होगा हर राज्य इकाई, हर मोर्चा, हर सांसद को रोजगार-संबंधी फीडबैक और हल के साथ मैदान में उतारना होगा।

उनके लिए चुनौती कठिन है। संक्षेप मेंः बेरोजगारी और वैश्विक व्यापार, दोनों मिलकर एक ही सवाल पूछ रहे हैं भारत के युवा को स्थिर आय और भविष्य की सुरक्षा कैसे मिले? नितिन नबीन की सबसे बड़ी परीक्षा इसी सवाल के 'विश्वसनीय उत्तर' देने में होगी।

लेख-वीना गौतम के द्वारा

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