
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
India US Trade Deal: इस ट्रेड डील को लेकर चर्चा शुरू होने के साथ ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने प्रारंभिक स्तर पर अमेरिका के अपने समकक्षों के साथ वार्ता शुरू कर दी, जबकि भारत से लेकर अमेरिका तक अधिकारिक स्तर पर विदेश मंत्रालय के अमेरिका मामलों के अतिरिक्त सचिव नायडू ने अपने समकक्ष और अन्य अधिकारियों से वार्ता शुरू की।
इसी बीच जब भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के किसी बयान की वजह से ट्रेड डील के भविष्य पर अनिश्चितता उत्पन्न होने की आशंका हुई, विदेश मंत्री से लेकर विदेश सचिव और अमेरिका मामलों के अतिरिक्त सचिव ने उसे अमेरिकी प्रशासन और अधिकारिक स्तर पर संभालने का कार्य किया।
इसमें अहम भूमिका विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और मुख्य प्रवक्ता जायसवाल ने भी निभाई, उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों के बाद उठने वाले सभी सवालों के ऐसे संतुलित और सधे हुए जवाब दिए, जिससे दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब होने से बचे और यह संदेश गया कि भारत अपनी प्रतिक्रिया से वह जाहिर कर रहा है कि वह अमेरिका की दोस्ती को बनाए रखना चाहता है।
इनके अलावा दूसरी ओर से इस ट्रेड डील के लिए वाणिज्य मंत्री गोयल और वाणिज्य सचिव अग्रवाल भी लगातार सक्रिय रहे। गोयल ने स्वयं 3 बार अमेरिका की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी प्रशासन में अपने समकक्ष के साथ ही कई अन्य अधिकारियों से मुलाकात की।
उन्हें इस ट्रेड डील को लेकर भारत के नजरिए से अवगत कराने का प्रयास किया कि किस तरह से यह साझेदारी दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाएगी। अग्रवाल ने इस दौरान अपने अमेरिकी समकक्ष व उनकी टीम को वस्तु-दर-वस्तु के मुद्दे पर समस्त जानकारी दी। इस मोर्चे पर भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी अहम रोल अदा किया।
उन्होंने दिल्ली में ट्रेड डील के मुद्दे पर विदेश मंत्री से लेकर वाणिज्य मंत्री से अपने कार्यालय में मुलाकात की। उनके पक्ष को सुना और ट्रेड डील की राह में उत्पन्न हो रही बाधाओं को मिलकर दूर करने को लेकर कार्य किया। जब वह मुंबई गए तो उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ महाराष्ट्र में निवेश को लेकर बात की।
उन्होंने महाराष्ट्र में अमेरिकी निवेश आकर्षित करने का कार्य किया लेकिन साथ ही उन्होंने राजदूत सर्जियो गोर को यह विश्वास दिलाया कि अमेरिका और भारत श्रनिष्ठ मित्र हैं। अमेरिका के लिए भी यह ट्रेड डील काफी अहम थी।
यह कहा जा रहा है कि इसी वजह से राष्ट्रपति ट्रंप ने गोर को भारत में राजदूत बनाया, जिससे किसी भी स्तर पर अगर कुछ गड़बड़ी होती है, तो वह बतौर राजदूत स्थिति को नियंत्रित कर पाएं। अमेरिकी दुतावास का कार्य माहौल उनके आने के बाद बदल गया है, उनके रूप में भारत को भी ऐसा व्यक्ति मिल गया है जो सीधे भारत की बात अमेरिकी राष्ट्रपति तक पहुंचाने में सक्षम है।
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भारत-अमेरिका के बीच अंततः ट्रेड डील हो गई है, जिसे फादर ऑफ ऑल ट्रेड डील भी कहा जा रहा है। डील को इस मुकाम तक लाने में 10 किरदारों ने अहम भूमिका अदा की। इसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, विदेश सचिव विक्रम मिसरी, वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल, विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव के। नागराज नायडू, विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और प्रवक्ता रणधीर जायसवाल, अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा शामिल हैं।
लेख-संतोष ठाकुर नवभारत के द्वारा






