नवभारत संपादकीय: पर्यावरण मंत्रालय में अचानक तबादले क्यों? कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब

Environment Ministry Transfers: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के निजी सचिव सहित चार अधिकारियों के अचानक तबादले पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। मामले को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
Navbharat Editorial: Why the sudden transfers in the Environment Ministry? Congress seeks an answer from the government.
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव (फोटो: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Bhupender Yadav Secretary Transfer: कांग्रेस ने मुद्दा उठाया है कि केंद्रीय पर्यावरण व वनमंत्री दया भूपेंद्र यादव के निजी सचिव सहित 4 सचिवों का आनन-फानन तबादला क्यों किया गया? यादव के निजी सचिव भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी हैं, जिन्हें उनके मूल विभाग में वापस भेजा गया है। यद्यपि सचिव का तबादला प्रशासकीय निर्णय से होता है और इसका सामान्य जनता पर कोई असर नहीं पड़ता लेकिन अचानक हुई इस कार्रवाई को लेकर आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है।

पर्यावरण मंत्रालय में तबादलों से उठे सवाल

भूपेंद्र यादव को प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का विश्वासपात्र माना जाता है। महाराष्ट्र से लेकर बंगाल तक किसी भी विधानसभा चुनाव के लिए उन्हें वहां 6 महीने पहले भेजा जाता है। इसकी वजह उनकी संगठनात्मक कुशलता है। जब उनके 4 सचिवों का अचानक तबादला कर दिया जाता है, तो शंका होती है कि यह कदम क्यों उठाया गया? केंद्र सरकार का पर्यावरण मंत्रालय अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।

किसी भी बड़ी परियोजना के लिए इस विभाग की मंजूरी लेनी पड़ती है। इसके बगैर प्रोजेक्ट शुरू नहीं किया जा सकता। यूपीए सरकार के समय तत्कालीन पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। 2014 के चुनाव प्रचार अभियान में मोदी ने कांग्रेस पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा था कि उद्योजकों को 'जयंती टैक्स' देना पड़ता है।

पर्यावरण मंत्रालय फिर विवादों के घेरे में

अब उसी पर्यावरण मंत्रालय की बीजेपी को सफाई करनी पड़ रही है। कांग्रेस शासनकाल में जयराम रमेश के पास पर्यावरण मंत्रालय था, तब मुंबई की बहुमंजिला आदर्श इमारत तोड़ने को लेकर दिए गए कठोर आदेश विवादास्पद निकले।

उस समय जयराम रमेश का काफी विरोध हुआ था। मोदी सरकार के शुरुआती कार्यकाल में प्रकाश जावडेकर पर्यावरण मंत्री बनाए गए थे। उस समय पर्यावरणवादियों ने उनकी आलोचना करते हुए आरोप लगाए थे कि उन्होंने उद्योजकों को फायदा पहुंचाने के लिए पर्यावरण संबंधी कठोर नियमों में ढील दी थी।

चार सचिवों के तबादले से पर्यावरण मंत्रालय पर सवाल

वर्तमान सरकार के दौरान किसी भी मंत्री के सचिव की नियुक्ति प्रधानमंत्री कार्यालय की पूर्वानुमति से ही की जा सकती है। इसलिए यह चारों सचिव भी इसी तरीके से नियुक्त किए गए होंगे। इनके तबादले की कोई वजह नहीं बताई गई।

प्रधानमंत्री हमेशा दावा करते हैं कि उनकी सरकार में कोई भ्रष्टाचार नहीं है। फिर इन सचिवों को एकसाथ क्यों हटाया गया? पूर्व काल में हरित न्यायाधिकरण के कुछ आदेशों में हेरफेर करने की बात सामने आई थी।

बड़े निजी विद्युत प्रकल्पों को पर्यावरण विभाग द्वारा दी गई अनुमति में धांधली होने की शिकायत पूर्व ऊर्जा सचिव ने प्रधानमंत्री से की थी। क्या विवादग्रस्त पर्यावरण मंत्रियों की सूची में यादव का भी समावेश हो गया है? सचिवों का तबादला कर उन्हें चेतावनी तो नहीं दी गई? विपक्ष इस मुद्दे को उठाने की तैयारी में है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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