नवभारत विशेष: कैसे रुक पाएंगे नाबालिगों से हो रहे यौन अपराध?

Crime Control Measures: अपराध नियंत्रण के लिए कानूनों के प्रभावी और निष्पक्ष क्रियान्वयन, पुलिस सुधार, गवाहों की सुरक्षा और त्वरित न्याय व्यवस्था की आवश्यकता पर फिर बहस तेज हो गई है।
Navbharat Special: How can sexual crimes committed by minors be stopped?
नाबालिग सुरक्षा (फोटो: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Police Reform Criminal Justice: अपराधों को नियंत्रित करने के लिए वर्तमान कानून पर्याप्त हैं, बशर्ते कि उन्हें ईमानदारी, निष्पक्षता व सख्ती से लागू किया जाए। इसके लिए आवश्यक है कि पुलिस विभाग को स्वायत्तता प्रदान करते हुए उसे जवाबदेह व प्रोफेशनल बनाया जाए। सत्तारूढ़ दल के अधीन होने के कारण पुलिस पर अधिकतर मामलों में राजनीतिक दबाव होता है, जिससे वह निष्पक्षता से काम नहीं कर पाती।

सत्तारूढ़ दलों से जुड़े अपराधियों को लगता है कि उन्हें राजनीतिक शरण प्राप्त है, इसलिए कुछ भी कर लें उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा। फिर पुलिस का गैर-पेशेवर रवैया भी काफी हद तक अपराधों के लिए जिम्मेदार है। पुलिस सुधार के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि ट्रायल तेजी से समाप्त हों, लेकिन अदालतों में इतने अधिक मामले लंबित पड़े हैं कि ऐसा दुर्लभ ही होता है।

नाबालिग से दुष्कर्म मामला

गवाहों की सुरक्षा विश्वसनीय नहीं है और अदालती कार्यवाही भी लंबी चलती रहती है, जिससे असरदार आरोपी अपने आपको कानून के शिकंजे में आने से बचा लेते हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर में पुलिस ने एक होटल में छापा मारकर 13 वर्षीय बालिका को मुक्त कराया।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि एक रिक्शा चालक ने उसे अगवा करके होटल ऑपरेटर्स को बेचा था, जिन्होंने विभिन्न होटलों में कई दिनों तक उसका 32 व्यक्तियों से जबरन यौन शोषण कराया। इन अधेड़ उम्र के लोगों को, जो पैसे से भी संपन्न होंगे कि अपनी बेटी या पोती की आयु की नाबालिग लड़की का जबरन यौन शोषण करते हुए जरा भी शर्म नहीं आई।

मामले में SIT जांच तेज 14 आरोपी गिरफ्तार

उन्होंने ऐसे कुकर्म पहले भी किए होंगे और होटल ऑपरेटर्स से इनकी सांठगांठ होगी, वर्ना यह कैसे संभव है कि एक नाबालिग लड़की को खरीदा जाए और फिर चंद दिनों में 3 होटलों में उसे 32 दरिंदों के सामने फेंक दिया जाए। यह संगठित अपराध का मामला प्रतीत होता है, जिसकी जांच होना आवश्यक है।

वैसे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसआईटी (विशेष जांच दल का गठन किया गया है। 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक होटल का मालिक व 2 होटल मैनेजर भी शामिल हैं। अन्य गिरफ्तारियां भी जल्द होने का अनुमान है। 3 होटलों खुनगर, जॉय इन व सफायर पर बुलडोजर कार्रवाई करते हुए उन्हें पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है।

होटल में जो दुकानें थीं, उन्हें पहले ही खाली करा लिया गया था। शहर की जिन अन्य होटलों में इस किस्म के धंधे होने का शक है, उन्हें सील कर दिया गया है। इस नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म मामले में पुलिस के अनुसार उसके पास तकनीकी साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, साईट जांच, पीड़िता द्वारा आरोपियों की पहचान आदि सभी

कुछ है।

दुष्कर्म के दोषियों को मिले त्वरित और कड़ी सजा

आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए यह पर्याप्त है। बेहतर होगा कि इनके खिलाफ खुली अदालत में मुकदमा चलाया जाए, ताकि यह पूरे शहर के सामने शर्मसार हों, जनता को सबक मिले और कोई भी ऐसे घिनौने अपराध करने की हिम्मत न करे।

इसके अतिरिक्त पीड़िता के पुनर्वास के लिए इन्हीं आरोपियों से बतौर जुर्माना मोटी रकम वसूल की जाए। इस अपराध का फैसला अधिक से अधिक 10 दिनों के भीतर आ जाना चाहिए, क्योंकि देर से मिला न्याय भी न्याय नहीं होता है।

हैदराबाद में एक महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म व हत्या की घटना के बाद सड़क से संसद तक हो रहे विरोधों का तेलंगाना राज्य सरकार पर जबरदस्त दबाव पड़ रहा था, नतीजतन 6 दिसंबर 2019 की सुबह 3 बजे चारों संदिग्धों को 'मुठभेड़' में मार गिराया गया।

इस 'मुठभेड़' की प्रक्रिया पर अनेक प्रश्न खड़े किए जा सकते हैं (पुलिस रात में सीन क्यों रीक्रिएट कर रही थी? आदि), लेकिन यहां सवाल ही दूसरा है- क्या इस किस्म की कार्रवाई से देश में महिलाओं के खिलाफ निरंतर बढ़ रहे यौन अपराधों पर विराम लगाया जा सकेगा?

पुलिस से सक्रियता की उम्मीद

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर 18 मिनट पर एक महिला के साथ दुष्कर्म होता है। 29,909 बलात्कार पीड़ितों में से एक तिहाई नाबालिग थीं। ऐसा कोई अध्ययन या रिकॉर्ड नहीं है, जिससे यह साबित होता हो कि फांसी की सजा या 'मुठभेड़' से इतना डर बैठ जाता है कि अपराध होने बंद हो जाते हैं।

लेख-नौशाबा परवीन के द्वारा

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