नवभारत विशेष: 'काश किसी ने तुरंत पानी डाला होता...' एसिड अटैक सर्वाइवर की दर्दभरी अपील

Golden Hour Protocol: राष्ट्रीय महिला आयोग की 'नवजीवन' रिपोर्ट में एसिड अटैक पीड़ितों के लिए 'गोल्डन आवर प्रोटोकॉल' लागू करने की सिफारिश की गई है, ताकि शुरुआती उपचार से जान और भविष्य बचाया जा सके।
Navbharat Special: 'If only someone had poured water immediately...' An acid attack survivor's heart-wrenching plea.
एसिड अटैक, गोल्डन आवर,(सोर्स : नवभारत डिजाइन फोटो )
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Golden Hour Protocol Acid Attack Survivor Care: 'काश किसी ने मुझ पर तुरंत पानी डाल दिया होताशायद मेरा चेहरा, मेरी आंखें और मेरी जिंदगी इतनी नहीं बदलती।' राष्ट्रीय महिला आयोग में एसिड अटैक से जीवित बची एक बेटी ने मुझसे यह बात कही थी। उसके शब्द आज भी मेरे मन में गूंजते हैं। उस दिन मुझे एहसास हुआ कि कई बार किसी पीड़िता की जिंदगी बड़े फैसलों से नहीं, बल्कि पहले कुछ मिनटों में उठाए गए एक सही कदम से बदल सकती है।

एसिड अटैक केवल किसी व्यक्ति के चेहरे पर नहीं, बल्कि उसके आत्मविश्वास, उसके सपनों और उसके भविष्य पर हमला होता है। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि इस भयावह अपराध के बाद का पहला एक घंटा जिसे डॉक्टरों की भाषा में 'गोल्डन आवर' कहा जाता है- नई उम्मीद की शुरुआत बन सकता है। जनवरी 2026 में राष्ट्रीय महिला आयोग ने 'नवजीवन' नाम से एक राष्ट्रीय परामर्श आयोजित किया।

इसमें एसिड अटैक सर्वाइवर्स, डॉक्टरों, प्लास्टिक सर्जनों, कानूनी विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने एक साथ बैठकर चचर्चा की। इस परामर्श का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष गोल्डन आवर प्रोटोकॉल रहा। परामर्श के आधार पर तैयार 'नवजीवन' रिपोर्ट एवं आयोग की विस्तृत अनुशंसाएं भारत सरकार को भेजी जा चुकी हैं, ताकि इन्हें नीति और स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा बनाया जा सके।

एसिड अटैक में पहले 45 मिनट का उपचार सबसे अहम

बहुत कम लोग जानते हैं कि एसिड तब तक शरीर को जलाता रहता है, जब तक उसे पूरी तरह धोकर हटाया न जाए, इसलिए प्रभावित हिस्से को कम-से-कम 30 से 45 मिनट तक लगातार स्वच्छ बहते पानी से धोना सबसे प्रभावी प्राथमिक उपचार है। यही कदम जलन की गंभीरता कम कर सकता है, त्वचा को बचा सकता है और कई मामलों में पीड़िता की दृष्टि भी सुरक्षित रख सकता है।

इसीलिए राष्ट्रीय महिला आयोग ने अनुशंसा की है कि गोल्डन आवर प्रोटोकॉल को देश के प्रत्येक सरकारी और निजी अस्पताल में अनिवार्य रूप से लागू किया जाए। डॉक्टरों, नसों, एम्बुलेंस कर्मियों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारियों सहित सभी स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि प्रत्येक पीड़िता को बिना किसी देरी के वैज्ञानिक और मानवीय उपचार मिल सके।

एसिड अटैक पीड़ितों के लिए 'गोल्डन आवर' उपचार पर जोर

'नवजीवन' परामर्श में गोल्डन आवर प्रोटोकॉल के अलावा चार प्रमुख चिकित्सा सिफारिशें भी की गई- प्रत्येक बड़े सरकारी और निजी अस्पताल में एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए समर्पित विशेष वार्ड स्थापित किए जाएं; सर्वाइवर्स को रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी, नेत्र देखभाल और अन्य आवश्यक उपचार सहित आजीवन निःशुल्क चिकित्सा उपलब्ध कराई जाए।

तथा इसके लिए आयुष्मान भारत के अंतर्गत विशेष पैकेज विकसित किए जाएं; जिला स्तर पर बर्न केयर उत्कृष्टता केंद्र और समर्पित एसिड अटैक सेल स्थापित किए जाएं, तथा अस्पतालों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर चिकित्सा कर्मियों और आम नागरिकों को सर्वाइवर्स के अधिकारों, गोल्डन आवर के महत्व और निःशुल्क उपचार की जानकारी दी जाए, यदि किसी के सामने ऐसी घटना घटे, तो सबसे पहले पीड़िता को एसिड के स्रोत से दूर ले जाएं, एसिड लगे कपड़ों को सावधानीपूर्वक हटाएं और बिना एक पल गंवाए प्रभावित हिस्से को लगातार स्वच्छ बहते पानी से धोना शुरू करें। घाव पर तेल, हल्दी, टूथपेस्ट, बर्फ या कोई अन्य घरेलू पदार्थ लगाने से बचें।

यदि आंखें प्रभावित हों, तो उन्हें भी लगातार स्वच्छ पानी से धोना चाहिए। कई बार यही सरल कदम किसी व्यक्ति की रोशनी, उसका चेहरा और उसका भविष्य बचा सकते हैं। यदि हम यह सुनिश्चित कर सकें कि एसिड अटैक की शिकार हर बेटी को पहले साठ मिनट के भीतर सही उपचार मिले, तो हम केवल उसका चेहरा ही नहीं, उसका आत्मविश्वास, उसकी पहचान और उसके सपनों को भी बचा सकते हैं।

- लेख-राष्ट्रीय महिला आयोग, अध्यक्ष, विजया रहाटकर के द्वारा

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