सावन में करें भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, हर धाम का अपना है विशेष महत्व

12 Jyotirlingas: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। अगर आप भी सावन में भोलेनाथ के पवित्र धामों के बारे में जानना चाहते हैं, तो देखिए 12 ज्योतिर्लिंगों की खास तस्वीरें।
Visit the 12 Jyotirlingas of Lord Shiva during the month of Sawan; each shrine holds its own special significance.
12 ज्योतिर्लिंग (सोर्स सोशल मीडिया)
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हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। इस पूरे महीने श्रद्धालु व्रत रखते हैं, जलाभिषेक करते हैं और भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि सावन में भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं देश के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों के बारे में, जिनका अपना अलग धार्मिक और पौराणिक महत्व है।
हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। इस पूरे महीने श्रद्धालु व्रत रखते हैं, जलाभिषेक करते हैं और भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि सावन में भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं देश के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों के बारे में, जिनका अपना अलग धार्मिक और पौराणिक महत्व है।
Somnath Jyotirlinga
गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान पर माना जाता है। अरब सागर के किनारे स्थित यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इतिहास में कई बार इस मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ, लेकिन इसकी आस्था कभी कम नहीं हुई। सावन के महीने में यहां लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक और विशेष पूजा के लिए पहुंचते हैं।
Mallikarjuna Jyotirlinga
आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम पर्वत पर स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। यह मंदिर घने जंगलों और नल्लमाला पर्वत श्रृंखला के बीच स्थित होने के कारण प्राकृतिक सुंदरता का भी अद्भुत उदाहरण है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां दर्शन करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है। सावन में यहां विशेष अनुष्ठान और भव्य आरती का आयोजन किया जाता है।
Mahakaleshwar Jyotirlinga
मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध धामों में से एक है। यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग माना जाता है, जिसकी अपनी विशेष धार्मिक मान्यता है। यहां होने वाली प्रातःकालीन भस्म आरती विश्वभर में प्रसिद्ध है और इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन के दौरान पूरा मंदिर शिवभक्ति के रंग में रंग जाता है।
_Omkareshwar Jyotirlinga
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के बीच स्थित मंडहाता द्वीप पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग विराजमान है। कहा जाता है कि यह द्वीप 'ॐ' के आकार का दिखाई देता है, इसलिए इसका नाम ओंकारेश्वर पड़ा। प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण इस धाम को और भी खास बनाते हैं। सावन में यहां जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
Kedarnath Jyotirlinga
हिमालय की बर्फीली चोटियों के बीच समुद्र तल से लगभग 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ धाम सबसे कठिन लेकिन सबसे पवित्र शिव धामों में से एक है। यह चारधाम यात्रा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। कठिन यात्रा के बावजूद हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। सावन के महीने में इस धाम का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है तथा यहां शिवभक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है।
Kashi Vishwanath Jyotirlinga
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के सबसे प्राचीन और पूजनीय मंदिरों में से एक है। धार्मिक मान्यता है कि काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। सावन के पूरे महीने मंदिर को भव्य रूप से सजाया जाता है और बाबा का विशेष श्रृंगार किया जाता है। लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर जलाभिषेक करते हैं।
_Other major Jyotirlingas
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र), वैद्यनाथ (झारखंड), भीमाशंकर (महाराष्ट्र), नागेश्वर (गुजरात), रामेश्वरम (तमिलनाडु) और घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र) भी शामिल हैं। इन सभी ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख शिव पुराण में मिलता है और प्रत्येक धाम की अपनी अलग पौराणिक कथा और धार्मिक मान्यता है। सावन के महीने में इन मंदिरों में विशेष पूजा, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। देशभर से लाखों श्रद्धालु इन पवित्र धामों में पहुंचकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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