चैत्र नवरात्रि में कन्या पूजन की सही तिथि और शुभ मुहूर्त जानिए, पूजा सामग्री की लिस्ट नोट कर लें और पूजा विधि भी

इस बार चैत्र नवरात्रि सिर्फ 8 दिन की है, जिसके वजह से अष्टमी और नवमी तिथि और कन्या पूजन को लेकर कुछ असमंजस की स्थिति बनी हुई हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कन्या पूजन कब और कैसे करें।
चैत्र नवरात्रि में कन्या पूजन की सही तिथि और शुभ मुहूर्त जानिए, पूजा सामग्री की लिस्ट नोट कर लें और पूजा विधि भी
कब मनाई जाएगी अष्टमी और नवमी (सौ.सोशल मीडिया)
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Chaitra Navratri 2025: देवी आराधना का महापर्व चैत्र नवरात्रि अभी चल रहा है। चैत्र नवरात्र में अष्टमी और नवमी तिथि का बहुत अधिक महत्व हैं। अष्टमी तिथि को महागौरी की पूजा का विधान है तो महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा होती हैं।

हिंदू धर्म में कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। लोग अष्टमी और नवमी तिथि को कन्याओं का पूजन तथा भोजन कराते हैं। इस बार चैत्र नवरात्रि सिर्फ 8 दिन की है, जिसके वजह से अष्टमी और नवमी तिथि और कन्या पूजन को लेकर कुछ असमंजस की स्थिति बनी हुई हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कन्या पूजन कब और कैसे करें।

कब मनाई जाएगी अष्टमी और नवमी

पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 4 अप्रैल को रात 8:12 मिनट से शुरू होकर 5 अप्रैल 7:26 मिनट पर समाप्त होगी। उदिया तिथि के अुनसार, अष्टमी तिथि 5 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी. इसके बाद ही नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। इस बार 6 अप्रैल को नवरात्र के नवमी तिथि के साथ रामनवमी भी है। कन्या पूजन करने वाले लोग इस दिन भी कन्या पूजन के साथ पारण भी कर सकते हैं।

कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

महाअष्टमी पर कन्या पूजन का मुहूर्त: 5 अप्रैल सुबह 11:59 से लेकर 12:29 तक कर सकते हैं ।

महानवमी पर कन्या पूजन का मुहूर्त: 6 अप्रैल को सुबह 11:59 से दोपहर 12:50 तक कन्या पूजन कर सकते हैं।

कन्या पूजन की सामग्री की पूरी लिस्ट

कन्याओं का पैर धोने के लिए साफ जल, और कपड़ा, बैठना के लिए आसन, गाय के गोबर से बने उपले, पूजा की थाली, घी का दीपक, रोली, महावर, कलावा ,चावल, फूल, चुन्नी, फल, मिठाई, हलवा-पूरी और चना, भेंट और उपहार

क्या है कन्या पूजन विधि जानिए

कंजक पूजन के लिए अष्टमी या नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। फिर स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान गणेश और महागौरी की पूजा करें।

कन्या पूजन के लिए कन्याओं को और एक बालक को आमंत्रित करें। जब कन्याएं घर में आए तो माता का जयकारा लगाएं। उसके बाद सभी कन्याओं का पैर खुद अपने हाथों से धुलें और पोछें। इसके बाद उनके माथे पर कुमकुम और अक्षत का टीका लगाएं।

फिर उनके हाथ में मौली या कलावा बाधें। एक थाली में घी का दीपक जलाकर सभी कन्याओं की आरती उतारें। आरती के बाद सभी कन्याओं हलवा-पूरी, चना का भोग लगाएं। भोजन के बाद अपनी सामर्थ अनुसार कन्याओं को कुछ न कुछ उपहार जरूर दें। आखिरी में कन्याओं का पैर छूकर उनका आशीर्वाद जरूर प्राप्त करें।

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