
मां सरस्वती (सौ.सोशल मीडिया)
Saraswati Puja For Students: मां सरस्वती के जन्मदिन के उपलक्ष्य में देशभर में बसंत पंचमी का पावन पर्व बड़े ही उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस साल 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी है। इस दिन ज्ञान, वाणी, बुद्धि, विवेक, विद्या और सभी कलाओं से युक्त मां सरस्वती की पूजा की जाती है। यह दिन शिक्षा और कला से जुड़े व्यक्तियों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि वसंत पंचमी के दिन विधिपूर्वक मां सरस्वती की पूजा करने से व्यक्ति संगीत, कला और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है, और मां शारदा का आशीर्वाद सदैव अपने भक्तों पर बना रहता है।
सनातन परंपरा में मां सरस्वती को ज्ञान का शुद्ध स्वरूप माना गया है। वे अज्ञान के अंधकार को दूर कर विवेक और चेतना का प्रकाश प्रदान करती है।
बसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह प्रकृति, मन और बुद्धि के जागरण का प्रतीक भी माना जाता है। लोक मान्यता के अनुसार, इसी दिन से बसंत ऋतु का आरंभ माना जाता है, जो नवीन ऊर्जा, सृजन और सकारात्मकता का संकेत देती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तिथि पर सरस्वती की आराधना करने से व्यक्ति की सोच स्पष्ट होती है और सीखने की क्षमता बढ़ती है।
बसंत पंचमी का दिन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दिन कुछ विशेष कार्य करने से पढ़ाई में एकाग्रता, स्मरण शक्ति और बुद्धि में वृद्धि होती है।
बसंत पंचमी पर माँ सरस्वती की पूजा विधि सरल लेकिन प्रभावशाली मानी जाती है।
पीले पुष्प, अक्षत, हल्दी और मीठे भोग अर्पित करना शुभ होता है।
सरस्वती मंत्र का जाप करने से बुद्धि तेज होती है और पढ़ाई में रुचि बढ़ती है:
“या देवी सर्वभूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
इस मंत्र का 108 बार जाप करने से वाणी में स्पष्टता आती है और परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भी यह बहुत लाभकारी माना जाता है।
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यह तिथि मां सरस्वती के प्राकट्य से जुड़ी मानी जाती है, जिन्हें विद्या, बुद्धि, वाणी और विवेक की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की आराधना से ज्ञान का विकास होता है, विचारों में स्पष्टता आती है और मन एकाग्र होता है।






