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छोटे टीले से 80 फीट तक…छत्तीसगढ़ के अर्धनारीश्वर शिवलिंग का ऐसे बढ़ रहा आकार
Sawan Somwar: सावन के पवित्र मास में भक्त भगवान शिव की भक्ति में डूबे हुए हैं। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में एक ऐसा शिवलिंग है, जो न केवल प्राकृतिक रूप से निर्मित है, बल्कि हर साल इसका आकार बढ़ता है।
- Written By: आकाश मसने

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद स्थित भूतेश्वरनाथ मंदिर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Gariaband Bhuteshwarnath Temple: सावन के पवित्र मास में भक्त भगवान शिव की भक्ति में डूबे हुए हैं। इस दौरान देशभर के शिवालयों में भक्तों का तांता लगा रहता है। सावन मास में साेमवार को अलग महत्व होता है। भक्त सोमवार के दिन शिवालयों में पहुंचते हैं और शिवभक्ति में लीन हाे जाते हैं।
देशभर में ऐसे कई मंदिर हैं, जो हैरत में भी डाल देते हैं। ऐसा ही एक मंदिर है छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित भूतेश्वरनाथ का मंदिर, जिसकी बात ही निराली है। आइए जानते हैं सावन सोमवार के अवसर इस मंदिर के बारे में…
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित भूतेश्वरनाथ का मंदिर में अर्धनारीश्वर शिवलिंग न केवल प्राकृतिक रूप से निर्मित है, बल्कि हर साल इसका आकार बढ़ता है। यह चमत्कार भक्तों को आश्चर्यचकित करने के साथ-साथ उनकी आस्था को और गहरा कर देता है।
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गरियाबंद जिला मुख्यालय से मात्र 3 किलोमीटर दूर, घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे मरौदा गांव में यह विशाल शिवलिंग विराजमान है, जिसे भूतेश्वरनाथ या भकुर्रा के नाम से भी जाना जाता है।
अर्धनारीश्वर स्वरूप में होती है शिवलिंग की पूजा
छत्तीसगढ़ सरकार की आधिकारिक वेबसाइट की मानें तो, यह शिवलिंग अर्धनारीश्वर स्वरूप में पूजा जाता है। जहां देश के कई मंदिरों के शिवलिंग के आकार के छोटे होने की बात सामने आती है, वहीं भूतेश्वरनाथ शिवलिंग हर साल आकार में बढ़ रहा है। यह अनोखा चमत्कार भक्तों को और भी हैरत में डालता है।
क्या है इसकी कहानी?
मंदिर के बारे में एक दंतकथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि करीब 30 साल पहले यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा था। मरौदा गांव के आसपास के ग्रामीणों को एक छोटे से टीले से बैल के हुंकारने जैसी आवाज सुनाई देती थी। छत्तीसगढ़ी भाषा में ‘हुंकार’ को ‘भकुर्रा’ कहते हैं, जिससे इस शिवलिंग का नाम पड़ा।
जब ग्रामीण उस टीले के पास पहुंचते, तो वहां कोई जानवर नहीं मिलता। धीरे-धीरे ग्रामीणों की इस टीले के प्रति आस्था जागी और उन्होंने इसे भगवान शिव का स्वरूप मानकर पूजना शुरू कर दिया। आज वही छोटा सा टीला 80 फीट ऊंचा विशाल शिवलिंग बन चुका है, जो हर साल बढ़ रहा है।
सावन और महाशिवरात्रि पर पहुंचते है भक्त
सावन के सोमवार और महाशिवरात्रि के अवसर पर हजारों कांवरिए लंबी पैदल यात्रा कर इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। घने जंगलों और पहाड़ियों से होकर गुजरने वाली यह यात्रा भक्तों की श्रद्धा को और प्रगाढ़ करती है। हर साल भक्तों की संख्या में इजाफा हो रहा है, क्योंकि इस शिवलिंग के बढ़ते आकार को लोग चमत्कार मानते हैं। मंदिर के आसपास का प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण भक्तों को भक्ति में डुबो देता है।
यह भी पढ़ें:- हरिद्वार का मनसा देवी मंदिर: आस्था और मन्नतों का धाम, पूरी होती है हर मनोकामना
भूतेश्वरनाथ मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों का मानना है कि इस शिवलिंग में अर्धनारीश्वर स्वरूप की शक्ति है, जो शिव और शक्ति के संतुलन को दिखाता है। भक्तों का विश्वास है कि यहां दर्शन करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-शांति मिलती है।
मंदिर की खोज और इसके बढ़ते आकार ने इसे वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए भी कौतूहल का विषय बना दिया है। मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग के पास जल तरंग भी कई बार देखी गई हैं।
सावन मास में भूतेश्वरनाथ मंदिर में भक्त बेलपत्र, दूध और जल चढ़ाकर भगवान शिव को प्रसन्न करते हैं। मंदिर परिसर में भजनों और मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देती है। स्थानीय प्रशासन और ग्रामीण मिलकर भक्तों के लिए सुविधाएं जुटाते हैं, ताकि उनकी यात्रा सुखद रहे।
Gariaband bhuteshwarnath temple ardhanarishwar shivling size increasing every year
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