Pradosh Kaal Puja: आज प्रदोष काल का समय क्या है? शाम इतने बजे से करें शिव पूजा, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं

Pradosh Kaal Puja Methods: आज प्रदोष काल का शुभ समय जानना बेहद जरूरी है क्योंकि इसी अवधि में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। जानिए प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त, शिव मंत्र।
Pradosh Kaal Time Today
भगवान शिव (सौ.Gemini)
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Pradosh Kaal Time Today: आज ज्‍येष्‍ठ महीने का पहला प्रदोष व्रत है। भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत इस बार गुरुवार के दिन पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

श्रद्धालु प्रदोष काल में व्रत रखकर शिव पूजा, अभिषेक और मंत्र जाप करते हैं, जिससे जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। जानिए प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त, कथा और मंत्र

आज प्रदोष काल का समय क्या है?

ज्योतिष एवं धर्मगुरु के अनुसार, प्रदोष व्रत में सबसे महत्वपूर्ण समय प्रदोष काल होता है। मान्यता है कि, इस समय भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को मनोवांछित फल मिलता है। बताया जा रहा है कि, आज प्रदोष व्रत काल  (Pradosh Kaal Puja) शाम 7 बजकर 4 मिनट से रात 9 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। ऐसे में इस समय में श्रद्धा और विधि-विधान से शिव पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाएगा।

प्रदोष व्रत काल में कैस करें पूजा

प्रदोष व्रत की पूजा में शाम को विधिवत तरीके से भगवान शिव की पूजा करना चाहिए. इसके लिए शाम को स्‍नान करें। फिर भगवान शिव का अभिषेक पूजन करें। प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें, मंत्र जाप करें. आरती करें. ऐसा करने से ही व्रत का पूरा फल मिलता है।

गुरु प्रदोष व्रत की कथा

इस व्रत कथा के अनुसार, एक बार देवराज इंद्र और वृत्तासुर के बीच भयंकर युद्ध हुआ। युद्ध में देवताओं ने पहले दानव सेना को पराजित कर दिया, लेकिन वृत्तासुर ने क्रोधित होकर विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे देवता भयभीत हो गए। सभी देवता गुरु बृहस्पति की शरण में पहुंचे। बृहस्पति जी ने बताया कि वृत्तासुर पहले चित्ररथ नामक राजा था, जिसने भगवान शिव की तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया था। लेकिन एक बार उसने कैलाश पर्वत पर भगवान शिव और माता पार्वती का उपहास किया, जिससे माता पार्वती ने उसे राक्षस बनने का शाप दे दिया।

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बाद में वह त्वष्टा ऋषि की तपस्या से वृत्तासुर बना। गुरु बृहस्पति ने देवताओं को गुरु प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। इंद्र ने यह व्रत श्रद्धा से किया, जिससे भगवान शिव प्रसन्न हुए और अंततः इंद्र को वृत्तासुर पर विजय प्राप्त हुई।

        शिव मंत्र

भगवान शिव का गायत्री मंत्र : 'ऊं तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥'

महामृत्युंजय मंत्र : 'ऊं त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥'

शिव जी का पंचाक्षरी मंत्र : 'ऊं नम: शिवाय'

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