संभाजीनगर मनपा की स्थायी समिति बैठक में जल संकट पर महासंग्राम, 15-20 दिन में एक बार पानी, तो कर वसूली क्यों?

Chhatrapati Sambhajinagar Municipal Corporation की स्थायी समिति बैठक में पेयजल और संपत्ति कर वसूली को लेकर जमकर हंगामा हुआ। अनिल मकरिये ने नियमित जलापूर्ति होने तक पेयजल कर वसूली रोकने के निर्देश दिए।
Major Showdown Over Water Crisis at Sambhajinagar Municipal Corporation's Standing Committee Meeting: If Water Is Supplied Only Once Every 15–20 Days, Why Collect Taxes?
स्थायी समिति की बैठक (सोर्स: फाइल फोटो)
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Chhatrapati Sambhajinagar Municipal Corporation News: शहर में गंभीर जल संकट के बीच नागरिकों से पेयजल कर वसूलने के मुद्दे पर सोमवार को महानगरपालिका की स्थायी समिति की बैठक में जोरदार बहस हुई । बैठक में जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जब शहर वासियों को 15 से 20 दिन के अंतराल पर पानी मिल रहा है। तब नागरिकों से पेयजल कर की वसूली करना अन्यायपूर्ण है।

स्थायी समिति के सभापति अनिल मकरिये ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि संपत्ति कर की वसूली के लिए कड़ी कार्रवाई की जाए। लेकिन पेयजल कर की वसूली तत्काल प्रभाव से रोकी जाए। नई जलापूर्ति योजना शुरू होने और नियमित जल वितरण होने के बाद ही नागरिकों से पेयजल कर वसूला जाए। करीब पांच घंटे तक चली इस बैठक में करोड़ों रुपये की बकाया वसूली। गलत कर निर्धारण। अवैध निर्माण। मोबाइल टावर। होर्डिंग्स और सरकारी संस्थानों से कर वसूली में लापरवाही जैसे मुद्दों पर सदस्यों ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर सवालों की बौछार की।

1279 करोड़ रुपये बकाया, वसूली सिर्फ 35 करोड़ रुपये

बैठक में सबसे अधिक नाराजगी महानगरपालिका की बकाया कर वसूली को लेकर दिखाई दी। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि महानगरपालिका पर 1279 करोड़ रुपये की भारी बकाया राशि लंबित है। लेकिन अब तक केवल 35 करोड़ रुपये की ही वसूली हो पाई है। इसको लेकर वंचित के नगरसेवक अमित भुईगल ने प्रशासन को घेरा। संपत्ति कर वसूली को लेकर चली लंबी बहस में नगरसेवक राज वानखेडे, एड ।माधुरी अदवंत, अलमास खान, अजहर पटेल, शेख मतीन हिस्सा लेते हुए कहा कि करोड़ों रुपये संपत्ति कर बकाया होने के बावजूद प्रशासन प्रभावी कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है। बड़े बकाया दारों पर कार्रवाई नहीं की जा रही। जबकि सामान्य नागरिकों पर लगातार दबाव बनाया जाता है।

शहर की कर व्यवस्था पर उठे कई गंभीर सवाल

बैठक की शुरुआत होते ही जनप्रतिनिधियों ने संपत्ति कर विभाग से शहर की कुल कर मांग। पिछले तीन वर्षों की वसूली। कर जमा करने वाले नागरिकों की संख्या। बकायेदारों का वर्गीकरण। मोबाइल टावर। विज्ञापन होर्डिंग और शैक्षणिक संस्थानों की बकाया राशि की विस्तृत जानकारी मांगी। सदस्यों ने यह भी पूछा कि शहर में कितनी ऐसी संपत्तियां हैं जिन पर अब तक कर नहीं लगाया गया है। वर्षों से लंबित बकाया की वसूली क्यों नहीं की गई। तथा बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और संस्थानों को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है।

नियमित कर देने वालों को ही परेशान किया जा रहा है

बैठक में कई सदस्यों ने आरोप लगाया कि जो नागरिक नियमित रूप से कर जमा करते हैं। उन्हीं को बार-बार नोटिस भेजे जाते हैं और दबाव डाला जाता है। जबकि जिन संपत्तियों पर अब तक कर निर्धारित नहीं किया गया। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। सदस्यों ने कहा कि प्रशासन को पहले उन संपत्तियों की पहचान करनी चाहिए जो वर्षों से कर दायरे से बाहर हैं। इसके बाद ही सामान्य नागरिकों पर कार्रवाई की जाए।

गलत माप और कर निर्धारण करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग

बैठक में गलत तरीके से संपत्तियों की माप कर अधिक कर लगाने के मामलों को भी गंभीरता से उठाया गया। सदस्यों ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने भ्रष्टाचार या दबाव में आकर गलत कर निर्धारण किया है। तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि कर निर्धारण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनाई जाए। ताकि नागरिकों के साथ अन्याय न हो। कई नगरसेवकों ने कर विभाग में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा संपत्ति धारकों से सालों से बकाया कर लगाने का डर दिखाकर लाखों रुपए ऐंठने का आरोप लगाया।

मोबाइल टावर, होर्डिंग्स और सरकारी संस्थानों की बकाया राशि पर भी चर्चा

बैठक में शहर के मोबाइल टॉवर, अधिकृत और अवैध होर्डिंग्स, शैक्षणिक संस्थानों तथा सरकारी कार्यालयों से कर वसूली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। सदस्यों ने कहा कि बड़े बकायेदारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से महानगरपालिका को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। प्रशासन को विशेष अभियान चलाकर इन बकाया की वसूली करनी चाहिए।

झुग्गी बस्तियों के लिए अलग नीति बनाने की मांग

बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि झुग्गी बस्तियों के नागरिकों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उनके लिए अलग नीति बनाई जानी चाहिए। सदस्यों ने कहा कि गरीब नागरिकों पर अनावश्यक दबाव बनाना उचित नहीं है।

संपत्ति कर विभाग ने प्रस्तुत किया विस्तृत ब्यौरा

बैठक में संपत्ति कर विभाग की ओर से प्रस्तुतीकरण किया गया। अधिकारियों ने दोहरी कर वसूली। रिकॉर्ड में दर्ज संपत्तियां। सर्वेक्षण प्रक्रिया। शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों की बकाया राशि तथा कर वसूली की प्रक्रिया की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि शहर में संपत्तियों का सर्वेक्षण आधुनिक तकनीक के माध्यम से किया जा रहा है। ताकि कर निर्धारण अधिक सटीक और पारदर्शी हो सके।

मैन पावर बढाना जरूरी

नगरसेवकों के सारे प्रश्नों पर जवाब देते हुए उपायुक्त विकास नवाले ने स्पष्ट किया कि वसूली के लिए मैन पावर की काफी कमी है। प्रभागों में जो कर्मचारी वसूली का काम कर रहे हैं, उनका इस्तेमाल परिसर में अतिक्रमण हटाओ मुहिम के लिए भी किया जाता है, जिससे वसूली पर असर पड़ रहा है। इस पर आयुक्त अमोल येडगे ने साफ किया कि वसूली विभाग में अधिक कर्मचारी देने के लिए प्रशासन गंभीरता से विचार कर रहा है।

दो महीने में ठोस परिणाम देने के निर्देश

बैठक के अंत में सभापति अनिल मकरिये ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि संपत्ति कर वसूली के लिए तुरंत प्रभावी कार्रवाई शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि संपत्तियों का सर्वेक्षण, सरकारी संस्थानों से वसूली, दैनिक वसूली बढ़ाने, क्षेत्रीय कार्यालयों में कर्मचारियों की नियुक्ति तथा तकनीकी व्यवस्था मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। सभापति मकरिए ने स्पष्ट कहा कि जनप्रतिनिधियों का पूरा सहयोग प्रशासन को मिलेगा। लेकिन नागरिकों के साथ अन्याय किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट

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